तराना। वैदिक काल से भारतभूमि को दुनिया का अगुआ बनाने का जो सिलसिला शुरू हुआ लंबे समय तक जारी रहा। जनमानस को भक्ति की राह पर अग्रसर करने और उनको देवत्व का ज्ञान प्रदान करने वाले एक ऐसे ही महान संत का नाम नाना महाराज तराणेकर था। जिनके ज्ञान, शास्त्रार्थ, सत्संग, आभामंडल और उनके आशीर्वचन से उनके लाखों शिष्य कृतार्थ हुए
नाना महाराज तराणेकर का जन्म माँ अहिल्या की नगरी तराना में 13 अगस्त 1896 को नागपंचमी के दिन हुआ था। नाना महाराज का बचपन का नाम मार्तण्ड था। बालक मार्तण्ड ने बाल्यावस्था में स्कूली शिक्षा अपने पिता से ली और इसके साथ ही पिता के सानिध्य में वेदों का अध्ययन भी किया। बालक मार्तण्ड को कुछ ही समय में वेदों का ज्ञान प्राप्त हो गया। उनके पिता श्री शंकर तराणेकर शास्त्री तराना नगर में वेदों के ज्ञाता और संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे ऐसे ही सद्गुरु नानां महाराज तराणेकर का जन्मोत्सव नानां महाराज गुरु मंदिर परिवार एवं सेवा न्यास अध्यक्ष संजय तराणेकर की प्रेरणा से तराना में नानां के भक्तों द्वारा सद्गुरु नानां महाराज एवं मार्त्तन्डेश्वर महादेव का अभिषेक पूजन कर आकर्षक एवं मनमोहक श्रंगार कर साज सज्जा की गई नानां के भक्तों द्वारा नानां को 56 भोग की महाप्रसादी का भोग लगाया गया एवं ततपश्चात महाआरती की गई एवं देर शाम को नानां मंडली के पंकज दुबे द्वारा शानदार भजनों की प्रस्तुति देकर भक्तों को मंत्रमुग्ध किया उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में पंडित पंकज दुबे, जितेंद भाटी, प्रेमनारायण पाटीदार, नीरज चाँदना, प्रदीप परमार, विकास कसेरा, बब्लू राठौर,सुनील पाटीदार, सदानन्द दीक्षित,राजेश गुर्जर का सरहनीय योगदान रहा उपरोक्त जानकारी अर्पित बोड़ाना द्वारा दी गई।