सरवानिया महाराज। नगर के नागचंद्रेश्वर यानी खाकर देव मंदिर पर सुबह से ही भक्तों के दर्शन करने लिए तांता लगा हुआ है। पानी की टंकी के पास स्थित नाग देवता का यह धाम न्याय दंड और रक्षा के लिए क्षेत्र में नामी गिरामी देवस्थानों मे गीना जाता हैं। एकमात्र ऐसी अदालत है जो हर रविवार को लगती हैं और आवश्यकता पड़ने पर इसके अतिरिक्त दिन भी लग जाती हैं। नाग देवता की इस अदालत में अधिकतर मामलों सर्पदंश या अन्य जहरीले जीव जंतुओं से जुड़े आते हैं जिनमें सभी पीड़ितों को जीवन में प्राणों की रक्षा के साथ साथ खुशहाली की कामना का आदेश जारी किया जाता हैं। (यह मंदिर पीड़ितों को अस्पताल जाने की मनाही नहीं करता) यहां के भक्तों की आस्था संमदर सी गहरी और पहाड़ सी उंची है। इस स्थान पर अब शिव परिवार व तेजा बावजी महाराज ने भी अपना आशियाना बनाया है। नागपंचमी के विषेश अवसर पर दोपहर 3.30 बजे भगवान नागचंन्द्रेश्वर की आरती के पश्चात भक्तों को दुध चावल से बनी खीर का प्रसाद के रूप में वितरण किया।
राजा परीक्षित तक्षक नाग और पंचमी-
नागपंचमी के मूल में तक्षक नाग के द्वारा राजा परीक्षित को डसने के बाद उनके पौत्र जन्मजेय द्वारा बदला लेने की कथा और आस्तिक मुनि द्वारा जन्मजेय को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बदला लेने से रोकने की कथा से नाग पंचमी का उदय होना है।और इस पंचमी तिथि को हमारे देश में नागपंचमी के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त नागदेवता को दुध चढ़ाकर पुजते है। यहां नागदेवता को दुध चढ़ाने के लिए एक बांबी बनी हुई है जिसमें भक्त दुध चढ़ाते हैं। जिन जातकों की कुंडली मे राहु केतु विद्यमान हैं उन्हें आज विषेश रुप से नाग देवता की पुजा करनी चाहिए।
अदालत में आया था एक बार झुंठा मुकदमा, सच जान उड़ गए होश-
बहुत पहले की बात है जब नगर के इस नाग देवता के मंदिर खाकर देव पर हमारे समीप के गांव (दरियासे परिवर्तित नाम) के एक व्यक्ति ने इस अदालत को कसोटी पर उतारने की नियत से खुद को पराणी के आगे लगी नुकीली कील से मतलब नुकीली वस्तु से दंश लगाकर अदालत में अपने अन्य साथियों सहित आ गया। उस जमाने का ये अनोखा मुकदमा इस अदालत में आया था जिसमें खुद नागदेवता को अपनी सच्चाई साबित करनी थी अपने आप को कसोटी पर परखना था। तबके हमारे बुजुर्ग कहा करते थे कि अदालत ने मामले की गहराई को समझते हुए नुकीली वस्तु के दंश वाले को देखते ही पहचाना और कहा ये सर्पदंश नहीं है वो पराणी लावों अपने गांव से जिससे तुमने खुद दंश लगाया है। बताते हैं उसके साथी अपने गांव (दरियासे परिवर्तित नाम) उस नुकीली वस्तु लगी पराणी को लेकर आये और नागदेवता के तात्कालिक पंडा जी ने भरी अदालत में उस पराणी को झटका तो उस पराणी से एक नाग देवता निकले और उस व्यक्ति का डस लिया। बताते है उसके बाद उस व्यक्ति की मौत हो गई थी। उसके बाद आज तक किसी ने भी न्याय रक्षा और दंड देने वाली इस अदालत की तोहीन नहीं की। तोहीने अदालत के इस फैसले से उस वक्त लोगों ने दांतों तले उंगलियां दबा ली थी लेकिन उस फैसले की गुंज आज भी यहां सुनाई देती हैं।
खाकर देव मंदिर विकास समिति के प्रयास लाये रंग-
खाकर देव मंदिर संस्थान के विकास कार्य हेतु शहर वासियों के सहयोग से बनी मंदिर विकास समिति ने पिछले वर्षों में जो प्रयास किये वे प्रयास अब रंग लाते दिख रहे हैं। पहले जब किसी जमाने में यहां एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था अब वह एक विशाल मंदिर का आकार ले चुका है मंदिर के मस्तिष्क पर सुमेरु पर्वत की तरह खड़ा शिखर आसमां से अट्टहास करता दिखता है। इसके साथ-साथ अच्छी लंबाई वाला हाल भक्तों के लिए सराय तथा यहीं पर शिव परिवार की स्थापना शिव आराधना करने वाले उपासकों के लिए तथा तेजा जी महाराज की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इस मंदिर की भव्यता और बढ़ गई है। मंदिर विकास समिति ने जन सहयोग से शासन से मदद प्राप्त कर इस संस्थान को विकास की ऊंचाइयों पर पहुंचाया है जो निश्चित ही तारीफे काबिल है।
निकली नागदेवता की शोभायात्रा-
शहर में नाग पंचमी के अवसर पर खाकर देव मंदिर से दोपहर को भगवान नागदेव की शोभायात्रा बाजें गांजे के साथ निकलीं जो शहर के प्रमुख मार्गो से होकर पुनः खाकर देव मंदिर पहुंची जंहा पर महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला पुरुषों तथा युवकों ने भाग लेकर धर्म लाभ लिया।