सरवानिया महाराज। हमारा भारत देश कृषि और ऋषि प्रधानता वाला देश है। ऋषि मुनियों की पावन भूमि पर आज 36 हजार से अधिक कत्लखाने है जो रात दिन हमारी संस्कृति और देवी देवताओं के प्रिय मुक पशुओं का कत्ल करने में लगे हैं। भारत की सरकार मांस निर्यात कर विदेशी मुद्रा भण्डार को बढ़ाने में लगी है। यह उपदेश आज सदर बाजार स्थित महावीर भवन में आचार्य 1008 श्री विजयराज जी म सा के संघ की साध्वी श्री मुक्ता श्रीजी ने दिये। साध्वी मुक्ता श्रीजी ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति देश को पतन की ओर ले जा रही हैं। हमारा देश अंहिसा का देश है। दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान, तुलसी घर ना छोड़िए जब तक तन मे प्राण। आज हम मेकअप के जमाने में आ गये है जानवरों को मारकर उनके अंश से बनी लिपस्टिक को लगाकर हम अपनी सुरत तो संवार सकते हैं परंतु आत्मा नही।
इस दौरान उर्मी श्रीजी म सा ने भी धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वासना और उपासना दो गति है। वासना का जाल मनुष्य को अधोगति मे ले जाता है। हमें उपासना और इज्ज़त का जीवन जीने की जरूरत है। हमारा चरित्र हमारी पहचान है। उपासना आत्मा की ज्योति को जगाने का काम करती हैं। हमें सदचरीत्र जीवन जीना है। आज हम कहा आगये है। दुराचार और लुट खसोट मध्य और मांस का बोलबाला बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि यंहा चातुर्मास काल हेतू आचार्य श्री विजयराज जी म सा की आज्ञानुवर्तिनी परम तपस्वी साध्वी मुक्ता श्रीजी, उर्मी श्रीजी, महिमा श्रीजी आदि ठाणा तीन सदर बाजार महावीर भवन मे विराजमान है। प्रवचन प्रात: 9 बजे से 11 बजे तक सुनने को मिलते है। बड़ीसंख्या मे धर्मावलंबी सहित अन्य श्रावक प्रवचन सुन धर्म लाभ ले रहे है।