भोपाल। दूसरी सूची आते ही कांग्रेस में बगावत सड़क पर आ गई। टिकट कटने से नाराज नेताओं ने 20 से ज्यादा सीटों पर प्रदेशभर में प्रदर्शन किया और त्याग-पत्र दिए। टिकट कटने से नाराज सुमावली विधायक अजब सिंह कुशवाह बसपा में शामिल हो गए हैं। महू से दो बार के विधायक अंतर सिंह दरबार शनिवार को शक्ति प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद फैसला लेंगे कि चुनाव लड़ना है या नहीं मुरैना विधायक राकेश मावई बोले- जिले की 6 सीटों पर कांग्रेस को हरवाऊंगा। टिकटों में नाथ के 130, दिग्विजय के 65 नाम, 34 सीटों पर पचौरी, अजय और अरुण के टिकट कपड़े फाड़ने वाले वीडियो के बाद रघुवंशी पीछे हटे, केपी के पूछने के बाद भी लड़ने के लिए हां नहीं कहा
कांग्रेस ने आमला विधानसभा सीट को छोड़कर 229 सीटों पर टिकट बांट दिए हैं। टिकट का क्राइटेरिया 5 सर्वे और 9 बिंदुओं पर उम्मीदवार का मूल्यांकन रहा, फिर भी पूर्व सीएम व पीसीसी चीफ कमलनाथ का बोलबाला रहा। नाथ के 130 समर्थकों को टिकट मिले। इनमें सज्जन वर्मा के 39 टिकट शामिल हैं। वर्मा की ओर से 42 नाम दिए गए थे, जिनमें से 39 को टिकट मिले। दिग्विजय कोटे में 65 टिकट उनके समर्थकों को मिले। बाकी 34 सीटों पर सुरेश पचौरी, अजय सिंह, अरुण यादव और जीतू पटवारी के टिकट रहे।
सबसे दिलचस्प पहले से घोषित तीन सीटों पर प्रत्याशी बदलना रहा। इसमें पहली सूची में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति का टिकट कटना था। उन्हें दूसरी सूची में गोटेगांव से शेखर चौधरी का टिकट ड्राप पर टिकट दिया गया। प्रजापति की वापसी में दिग्विजय और विवेक तन्खा की भूमिका रही। दोनों ने कमलनाथ से चर्चा की और प्रजापति का टिकट हो पाया। दिग्विजय और जयवर्धन के कपड़े फाड़ने वाले वीडियो के बाद कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी शिवपुरी से टिकट लेने के मामले में हट गए। केपी सिंह दिल्ली में कमलनाथ और दिग्विजय से मिले। जब केपी ने दिग्विजय के सामने ही रघुवंशी से पूछा कि शिवपुरी से चुनाव लड़ना है बताओ, मुझे बताते नहीं हो और भोपाल में शिकायत करते हो। रघुवंशी पीछे हट गए।
केपी सिंह का टिकट शिवपुरी से हुआ है, वे पिछले 6 विधानसभा चुनावों से पिछोर से चुनाव जीतते आ रहे हैं। उनका टिकट कांग्रेस ने सोची समझी रणनीति के तहत शिवपुरी से भाजपा के संभावित प्रत्याशी की वजह से किया है। सिंह की सहमति से पिछोर से शैलेंद्र सिंह को टिकट दिया गया था, लेकिन इस टिकट को चार दिन बाद ही बदलना पड़ा। इसकी बड़ी वजह शैलेंद्र की पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया से रिश्तेदारी रहा। दूसरी वजह, यहां से भाजपा ने प्रीतम लोधी को टिकट दिया है और इस सीट पर 50 हजार से ज्यादा वोटर लोधी है। इसलिए कांग्रेस को अरविंद लोधी को टिकट देना पड़ा।
पिछले चार महीने में 60 से ज्यादा भाजपा और अन्य दलों के बड़े नेताओं ने थामा कांग्रेस का का दामन पिछले चार महीने में 60 से ज्यादा भाजपा और अन्य दलों के नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। इनमें से पार्टी ने भाजपा से आए बड़े नेताओ में दीपक जोशी, गिरजा शंकर शर्मा, समंदर पटेल, अभय मिश्रा, भंवर सिंह शेखावत, बैजनाथ यादव, नीरज शर्मा, बोध सिंह भगत, राव यादवेंद्र सिंह, जीवनलाल सिद्धार्थ को टिकट दिया है। अन्य बड़े नेताओं में चंद्रभूषण बुंदेला और विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को टिकट नहीं मिल पाया। कांग्रेस से जिन विधायकों के टिकट कटे हैं उनमें सुमावली से विधायक अजब सिंह कुशवाह का टिकट कटने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। बड़नगर से विधायक मुरली मोरवाल और मोहन सिंह पलदूना ने बाहरी को टिकट दिए जाने से मोर्चा खोल दिया है। हालाकि टिकट बांटने के बाद डैमेज कंट्रोल करने के लिए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सीधे असंतुष्टों से बात कर रहे हैं।
कमलनाथ की 15 महीने की सरकार में मंत्री रहे इकलौते मंत्री वरिष्ठ विधायक आरिफ अकील का स्वास्थ्य कारणों की वजह से टिकट कटा है। उनकी सीट पर उनके बेटे आतिफ अकील को टिकट दिया गया है। कांग्रेस के जिन सिटिंग एमएलए के टिकट काटे गए है उनमें बड़नगर से मुरली मोरवाल, सुमावली से अजब सिंह कुशवाह, गोहद से मेवाराम जाटव, मुरैना से राकेश मावई, घोड़ाडोंगरी से ब्रह्मा भलावी और सेंधवा से ग्यारसीलाल रावत का टिकट काटा गया है। नकुलनाथ मप्र में कांग्रेस के इकलौते लोकसभा सांसद हैं, उन्होंने सबसे पहले छिंदवाड़ा में कहा था कि कमलनाथ छिंदवाड़ा से ही चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद नकुल ने परासिया से सोहनलाल बाल्मीकि, अमरवाड़ा से कमलेश प्रताप शाह, जुन्नारदेव से सुनील उइके और पांर्ढुना से नीलेश उइके को टिकट दिए जाने की घोषणा की। हालाकि ये पांचों सिटिंग एमएलए हैं।