दतिया। देश को आजाद हुए अब तक पूरे 77 बर्ष बीत चुके हैं सरकारों के दावे रहे हैं कि देश बदल रहा है। देश प्रगति कर रहा है। प्रधानमंत्री भी न खाऊंगा न खाने दूंगा के नारा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की तरक्की के लिए लगातार चिंतित दिखाई देते हैं और देश के तरक्की के लिए तमाम काम भी उनके द्वारा किया जा रहे हैं। लेकिन उनकी योजनाओं को मध्य प्रदेश में उन्हीं के नुमाइंदे पलीता लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आजादी के 77 वर्ष पूर्ण होने के बाद देश में कई आम चुनाव हो चुके हैं। नेता जनता के बीच जाते हैं और उनसे बड़े-बड़े दावे करते हैं इसके बदले उनका वोट लेकर सरपंच, विधायक सांसद बन जाते हैं पद प्रतिष्ठा पाने के बाद जनता की ना कोई सुनता है ना तो उनकी और कोई देखता है। हम एक ऐसे मामले के बारे में आपको बता रहे हैं। जहां देश के भविष्य अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर अपनी पढ़ाई पूरी करने एक गांव से दूसरे गांव जा रहे है। दतिया जिला मुख्यालय से तकरीबन 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम नरेटा में सिर्फ प्राथमिक विद्यालय है ।
इससे आगे की शिक्षा ग्रहण करने के लिए बच्चों को गांव से बाहर जाना पड़ता है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए बच्चे नरेटा गांव के समीप तगा गांव में पढ़ने जाते हैं। लेकिन तगा गांव जाने के लिए उन्हें बीच में बह रही एक नदी को पार करना पड़ता है ।बच्चों के नदी पार करने के दौरान एक दो बार घटनाएं भी घटित हो चुकी हैं। कुछ बच्चे पानी के तेज बहाव में बहकर अपनी जान गवा चुके है। लेकिन प्रशासन पर इस बात का कोई असर नहीं है।
इन बच्चों की सुध लेने के लिए कोई भी अधिकारी कर्मचारी आज तक वहां नहीं पहुंचा है। मिडिया ने नरेटा गांव पहुंची और जमीनी हकीकत जानी। हम वहां ग्रामीण एवं बच्चों से भी मुखातिब हुए। बच्चों की परेशानी देखकर कुछ समय के लिए तो हम भी भावुक हो गए। बच्चों को उस पानी के बीच निकलते देख ऐसा प्रतीत हो रहा था कि हम हिंदुस्तान नहीं अपितु किसी बेहद पिछड़े एरिया में खड़े हों। सभी छात्र और छात्राओं ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव से नदी पर रपटा बनवाने की भावुक अपील की है।