चित्तौड़गढ़। मेवाड़ क्षेत्र में लंबे समय से मादक पदार्थों व नशीली दवाइयों का सेवन करने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। नशा करने से परिवार में आर्थिक नुकसान होने के साथ उसके स्वास्थ्य पर भी गलत असर पड़ता है। नशे की लत इंसान को खोखला बनाती है। कुछ नशीली दवाइयां ऐसी होती हैं, जिसकी लत से समय रहते व्यक्ति को दूर नहीं जाए, तो वह उसकी मौत का कारण भी बन जाती है। शहर में शराब, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट का चलन ज्यादा है। लेकिन क्षेत्र की तंग बस्तियों में कुछ अलग प्रकार का नशा किया जाता है। आज के युवाओं को नशे से दूर करने के लिए हमें समाज को जागरूक करने की जरूरत है। उक्त बाते सोमवार को श्री कल्लाजी वैदिक विश्विद्यालय में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता और नशे के विरुद्ध शपथ कार्यक्रम में बतौर अध्यक्ष विश्वविद्यालय के चेयरपरसन कैलाशचन्द्र मूंदड़ा बोल रहे थे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं विश्वविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. स्मिता शर्मा ने शास्त्रों के विभिन्न पहलुओं तथा मनु स्मृति का संदर्भ देते हुए स्वविवेक से नशे से दूर रहने के लिए निर्देशित किया। बतौर मुख्य वक्ता डॉ. लोकेश चौधरी ने विभिन्न प्रकार के नशे में उपस्थित रासायनिक पदार्थों के बारे में जानकारी देते हुए उन रासायनिक पदार्थाे से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए योग के माध्यम से तनाव मुक्त रहते हुए नशे से दूर रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में आमन्त्रित वक्ता के रूप में उप कुलसचिव डॉ. श्रवण सैनी ने सभी को जीवन में किसी भी प्रकार का नशा ना करने तथा समाज में भी नशे से दूर रहने की जागरूकता फैलाने की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मनीष चाँदना ने भी अपने उदबोधन में नशे की प्रवृति में संगत का योगदान बताते हुए बुरी संगत से बचने की बात कही।
कार्यक्रम संयोजक डॉ सुनील शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की छात्र छात्राएं, परीक्षा नियंत्रक डॉ. चन्द्रवीर सिंह राजावत, रचना शर्मा, देवी लाल कुम्हार, देवेन्द्र जैन, हर्षिता झाला सहित सभी शैक्षणिक एवं शैक्षणिक गण मान्य उपस्थित रहे।