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March 20, 2024, 7:58 pm
KHABAR : जाजू कॉलेज इको क्लब की छात्राओं ने जाना गांधी सागर और रामपुरा में मछली पालन व प्रकृति संरक्षण का महत्व, मिला इनका मार्गदर्शन, पढ़े खबर 

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नीमच। जाजू कन्या महाविद्यालय नीमच के इको क्लब और जीव विज्ञान की छात्राओं ने गांधी सागर और रामपुरा का प्रकृति भ्रमण एपको भोपाल के तत्वावधान में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के तहत किया। प्राचार्य डॉ एन के डबकरा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में इको क्लब प्रभारी डॉ साधना सेवक प्रो अमृता सोनी सहित 25 छात्राओं ने भागीदारी की। चंबल नदी पर स्थित क्षेत्रफल में देश के सबसे दूसरे बड़े जलाशय  गांधीसागर बांध,  चंबल नदी के उद्गम,  उसके प्रवाह राज्यों और राज्यों को प्राप्त लाभ को जाना ।उसके जल से होने वाले विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया समझी तथा बांध के विहंगम दृश्य का अवलोकन और हिंगलाजगढ़  रिसोर्ट के बगीचे का आनंद लिया। तत्पश्चात नदी में उत्पादित होने वाली मछलियों की जानकारी मत्स्य महासंघ भोपाल के स्थानीय केंद्र रामपुरा में प्राप्त की । गांधी सागर के मत्स्य महासंघ क्षेत्रीय प्रबंधक  गोपाल डोंगरे ने रामपुरा में नदी से पकड़ी जाने वाली मछलियों के प्रकार, मत्स्य पालन, गिल नेट जाल द्वारा मत्स्याखेट,  मछलियों का एकत्रीकरण,  भंडारण,  पैकिंग , विपणन और बर्फ संयंत्र के कार्य विधि को विस्तृत में समझाया। 

 डोंगरे ने सारे विषयों को बड़े रोचक ढंग से वहां पर पाए जाने वाली एक-एक मछलियों को हाथ में पकड़ कर समझाया।  मध्य प्रदेश की राज्य मछली ष्महाशीरष् को छात्राओं ने पहली बार वहां पर देखा । राज्य का सबसे अच्छा  प्रबंधित  गांधी सागर जलाशय में पाए जाने वाली स्थानीय मछलियां तिलापिया, रोहू, कतला मृगला, चन्ना,  कैटफिश वेलेगो, सिंहला आदि प्रजातियों को रजिस्टर्ड मछुआरों द्वारा एकत्रीकरण के बाद वजन, आकार और प्रजातियों के अनुसार उनकी छंटनी की प्रक्रिया सहित संयंत्र में बनी बर्फ में पैकिंग की प्रक्रिया को प्रबंधक डोंगरेजी द्वारा समझाया गया। पैकिंग पश्चात उनका वजन, प्रकार के अनुसार उनकी लेबलिंग करके वाहनों के द्वारा हावड़ा और दिल्ली निर्यात की प्रक्रिया को समझा। 

डोंगरे ने इसे इस मछली पालन से उत्पन्न स्थानीय रोजगारों की जानकारी तथा इस क्षेत्र में रोजगारों के अवसरों की जानकारी दी। जीव विज्ञान की प्रो0 साधना सेवक ने भ्रमण कार्यक्रम में गांधी सागर अभयारण्य में पाए जाने वाले स्थानीय वृक्ष की प्रजातियां उनके औषधीय महत्व सहित वहां के खास पक्षी गिद्ध, जल में पाए जाने वाले पक्षियों के साथ स्थानीय वन्य प्राणियों की जानकारी दी। साथ ही गांधी सागर अभयारण्य में शीघ्र ही आने वाले चीता प्रोजेक्ट को समझाया और इसकी तैयारी को सबने देखा।

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