उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय में इन दिनों परीक्षाओं का दौर चल रहा है। हजारों छात्र परीक्षा देने पहुंच रहे हैं। परीक्षा दो शिक्षक और तीन कर्मचारी के भरोसे ही संचालित हो रही हैं। परीक्षा के दौरान मुख्य समन्वयक और समन्वयक मौजूद नहीं थे। परीक्षा नियंत्रक तो कभी परीक्षा केंद्र पर पहुंचे ही नहीं। हालांकि, कुलपति जरूर परीक्षाओं के दौरान निरीक्षण करते नजर आए।
विक्रम विश्वविद्यालय में मौजूदा स्थिति में विभिन्न विषयों के अंतर्गत प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, अतिथि शिक्षक मिलाकर कुल सौ से अधिक स्टाफ है। इसके बाद भी विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में शिक्षकों की जिम्मेदारी दिखाई नहीं दे रही है। विक्रम विश्वविद्यालय की परीक्षाओं का दौर मई से शुरू हो गया। इस दौरान विभिन्न विषय की सेमेस्टर व वार्षिक पद्धति की परीक्षाएं संचालित हो रही हैं।
10 जुलाई से बीएड और एमएड चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं दोपहर 3 से 6 बजे की शिफ्ट में प्रारंभ हुई हैं। विश्वविद्यालय के सुमन मानविकी भवन परीक्षा केंद्र पर 600 से अधिक विद्यार्थी 14 कमरे और 2 हॉल में परीक्षा देने के लिए पहुंचे थे। आश्चर्य की बात यह है कि महत्वपूर्ण परीक्षा और विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के बावजूद यहां केवल एक केंद्र अध्यक्ष और एक सहायक केंद्र अध्यक्ष और तीन विश्वविद्यालय के कर्मचारी ही परीक्षाओं की व्यवस्था में जुटे हुए दिखाई दिए।
इसके अलावा कोई अन्य शिक्षक, मुख्य समन्वयक, समन्वयक यहां मौजूद ही नही थे। जानकारी लेने पर भी कोई सही स्थिति नहीं बता सके। परीक्षा के दौरान वीक्षक का कार्य प्राइवेट शिक्षक और रिसर्च स्कॉलरों से लिया जा रहा है। जाहिर है ऐसी स्थिति में कैसे परीक्षा हो रही यह समझा जा सकता है।
कुलपति ने सवालों के गोल-मोल जवाब दिए
बुधवार को आयोजित बीएड-एमएड की परीक्षा के दौरान कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडे, सुमन मानविकी भवन केंद्र पर पहुंचे थे। उन्हाँने परीक्षा कक्षों में निरीक्षण किया। उनके सामने भी मुख्य समन्वयक और समन्वयक केंद्र पर मौजूद नहीं थे। जब कुलपति प्रो. पांडे से सवाल किया तो उन्होंने बचाव करते हुए कहा कि समन्वयक और मुख्य समन्वयक में यही होंगे। कहीं किसी कार्य से गए होंगे।
वहीं, परीक्षा नियंत्रक को लेकर उनका कहना था कि परीक्षा नियंत्रक विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे है, इसलिए परीक्षा केंद्र नही आ रहे है। हालांकि जब कुलपति से परीक्षा में अतिथि शिक्षकों से कार्य कराने संबंधी सवाल किया गया तो वे टाल गए। बता दें कि विश्वविद्यालय की अध्ययनशालाओं में करीब 90 अतिथि शिक्षक है, लेकिन उनसे परीक्षा कार्य नही लिया जाता है। कई बार तो निर्देश के बाद भी शिक्षक परीक्षा कार्य में नही जाते है।
परीक्षा कार्य के लिए होता है अतिरिक्त भुगतान
विक्रम विश्वविद्यालय की वार्षिक पद्धति या सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्र पर रहने वाले मुख्य समन्वयक व समन्वयक को 300 से 400 रुपए का भुगतान किया जाता है। वहीं जो कर्मचारी परीक्षा कार्य में शामिल होते है, उन्हे 100 रूपए और प्रायवेट कॉलेज के शिक्षक व रिसर्च स्कॉलर को एक परीक्षा के दौरान वीक्षक कार्य करने पर 100 रुपए दिए जाते है।