चित्तौड़गढ़। राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 के प्रारूप को लेकर सोमवार को संभाग स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। उदयपुर संभाग के लिए गठित विधेयक प्रारूप समिति के पैनल की ओर से आयोजित इस सुनवाई में आमजन, सामाजिक संगठनों, विधिवेत्ताओं और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव और विचार प्रस्तुत किए।
चित्तौड़गढ़ जिले की जनसुनवाई जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) सभागार, कलक्ट्रेट परिसर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधेयक प्रारूप समिति के सदस्य बसंत सिंह छाबा ने की।
जनसुनवाई में जिला कलक्टर डॉ. मंजू, अतिरिक्त जिला कलक्टर दिनेश धाकड़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा, अतिरिक्त जिला कलक्टर (भू-अभिलेख) रामचंद्र खटीक, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश पुरोहित सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बहुविवाह, लिव इन पंजीकरण और संपत्ति अधिकारों पर रखे सुझाव
जनसुनवाई में सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, विधिवेत्ताओं, एनजीओ और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपने सुझाव दिए।
इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष रतनलाल गाडरी, भाजपा जिला महामंत्री रघु शर्मा, बहुजन समाज पार्टी के गंगाराम मेघवाल, गायत्री सेवा संस्थान के देवीलाल प्रजापति, फादर डॉ. जॉनी पी. एब्राहिम, भगवत सिंह तंवर और महाराणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सहायक आचार्य मोहम्मद सत्तार कुरैशी सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे।
प्रतिभागियों ने बहुविवाह पर रोक, लिव इन रिलेशन का अनिवार्य पंजीकरण, भरण-पोषण की समान व्यवस्था, विवाह और तलाक के अनिवार्य पंजीकरण तथा पैतृक संपत्ति में बेटा-बेटी को समान अधिकार जैसे विषयों पर सुझाव दिए।
जनभागीदारी से तैयार होगा समावेशी विधेयक
पैनल ने सभी सुझावों और अभिमतों को गंभीरता से सुना और इन्हें प्रारूप समिति तक पहुंचाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की। अधिकारियों ने बताया कि जनसुनवाई का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों की सहभागिता के माध्यम से विधेयक को अधिक समावेशी, व्यवहारिक और जनभावनाओं के अनुरूप बनाना है।
जिला प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया। राज्य सरकार का उद्देश्य व्यापक जनभागीदारी के आधार पर ऐसा समान नागरिक संहिता विधेयक तैयार करना है, जिसमें सभी वर्गों की भावनाओं और सुझावों का समुचित समावेश हो।