चित्तौड़गढ़। निजी विद्यालयों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान को लेकर 15 जुलाई को राजस्थानभर में निजी विद्यालय एक दिवसीय सांकेतिक बंद रखेंगे। इस राज्यव्यापी महा-आंदोलन को प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, चित्तौड़गढ़ ने पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार के समक्ष वर्षों से लंबित विभिन्न मांगों के समाधान के लिए कई बार आग्रह किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। प्रमुख मांगों में पिछले चार वर्षों से लंबित प्री-प्राइमरी (पीपी) कक्षाओं के सरकारी भुगतान का तत्काल भुगतान, वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप आरटीई यूनिट कॉस्ट में वृद्धि, न्यायालय के आदेशानुसार आरटीई पुनर्भरण राशि का समयबद्ध भुगतान तथा आरटीई के तहत पुस्तकों की राशि सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में हस्तांतरित करना शामिल है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि 15 जुलाई का बंद एक दिवसीय सांकेतिक आंदोलन है। यदि सरकार ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को आगे चलकर अनिश्चितकालीन बंद का रूप दिया जा सकता है।
संगठन ने यह भी निर्णय लिया है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में प्रस्तावित श्राज्य शाला संबलश् जांच अभियान का भी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से बहिष्कार किया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि अनावश्यक जांच और प्रशासनिक दबाव से निजी विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
15 जुलाई को होगा ज्ञापन प्रदर्शन-
आंदोलन के तहत 15 जुलाई को जिले के सभी निजी विद्यालय पूर्णतः बंद रहेंगे। निजी विद्यालय संचालक, शिक्षक, कर्मचारी एवं अभिभावकों के प्रतिनिधि जिला मुख्यालय पर एकत्रित होकर जिला कलेक्टर एवं उपखंड अधिकारी (एसडीएम) के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
एसोसिएशन ने कहा कि यह आंदोलन केवल निजी विद्यालय संचालकों का नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों के भविष्य तथा लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इसलिए जिले के सभी निजी विद्यालयों ने एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने का निर्णय लिया है।