चित्तौड़गढ़। पन्नाधाय कॉलोनी तेरापंथ भवन में आयोजित समारोह में शतावधानी मुनि संजय कुमार ने महान आचर्य के जन्म से ही शुभ लक्ष्ण ग्रह योग होने से तेरापंथ के धर्म प्रवर्तक हुए। आचार्य भिक्षु जन्म से ही प्रतिभा सम्पन्न थे। शास्यज्ञ थे। शास्त्रार्थ में अजेय थे। तेरापंथ संविधान के निर्माता थे। वर्तमान में साधु समाज को शिथिलता चार से बचाने में लक्ष्मण रेखा काम करती है। 5 मर्यादा। एक गुरू 2 अपना अपना शिष्य नहीं बनाना। 3 अयोग शिष्य नहीं बनाना। 4 उतराधिकारी स्वयं आचार्य बनाए 5 गुरू कहे वहां चौमासा करे।
मुनि प्रसन्न ने कहा - स्थापना दिवस का मतलब सत्य मार्ग का स्थापना की जैन दर्शन में उसे सम्यक दर्शन यानि सच्ची श्रद्वा उसके बाद सम्यक आचार में परिवर्तन किया। वर्तमान संत समाज में कहीं कहीं धन संग्रह आश्रम अपने नाम प्रॉपर्टी आदि अनेक संतता विरूद्ध आचरण को ठीक करने संविधान बनाकर आज के दिन स्थापना एवं सभी ने संकल्प किया।
मुनि श्री ने कहा कि आज हर व्यक्ति का पहला प्रयास सच्चे अच्छे सतगुरू की खोज करनी चाहिए। हर व्यक्ति तराजु के पलड़ों पर नजर नहीं रख कर तराजु के मध्य कांटे पर नजर रहती है। विश्वास का आधार कांटा है। गुरू का भी वह महत्व है। धर्म का सही विश्वासगुरू पर होता। गुरू पर अटूट विश्वास होता है इसलिए कलयाण के मार्ग से भटकन जाएं इसलिए गुरू मार्ग दर्शक सही होना चाहिए।
मुनि प्रकाश कुमार जी ने 9 वर्ष के ज्ञानशाला के बच्चों को नवकार मंत्र स्मण एवं दृढ़ संकल्प कराया। अमर कुमार नवकार मंत्र के स्मरण से मृत्यु से कैसे बच गया। किा सुना कर बच्चों को प्रभावित किया। मुनि धैर्य कुमार भी अपने विचार रखे। तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष आदि अपनी टीम ने मंत्र दीक्षा में बच्चों को उत्साहित करने में योगदान किया।