चीताखेड़ा। समाज और इसके निर्माण प्रक्रिया में गुरु एक अभिन्न अंग है। सनातनी धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप माना गया है। गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरारू ,गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नमरू।
इसअर्थ के महत्व को समझाते हुए कहा कि - हे गुरु, आप देवताओं के समान हैं। आप ही भगवान ब्रह्मा हैं, आप ही भगवान विष्णु हैं और आप ही महेश हैं। आप देवताओं के देवता हैं। पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन रविवार को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया गया है। इस अवसर पर अलग-अलग 4 राज्यों के 10 जिलों के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर आर्शीवाद प्राप्त किया। गुरु पूर्णिमा सत्संग महोत्सव समारोह से राबडिया गांव बना वैकुंठ धाम।
उक्त अमृतोपदेश कथा मर्मज्ञ श्री श्री 1008 श्री पंडित लक्षानंद महाराज ने रविवार को राबडिया में बाकेश्वरी माता जी मन्दिर पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव सत्संग समारोह के दौरान उपस्थित बड़ी संख्या में धर्म सभा में उपस्थित गुरु भक्तों को अमृतवाणी प्रवाहित करते हुए कही गई है। गुरु शब्द ‘गु’ और ‘रु’ से मिलकर बना है। इसमें गु का अर्थ अंधकार, अज्ञान से है तो वहीं रु का अर्थ दूर करना या हटाना है। इस तरह से गुरु वह है जो हमारे जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर करते हैं और हमें ज्ञानी बनाते हैं। गुरु से ही जीवन में ज्ञान की ज्योति से सकारात्मकता आती है। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति करना है तो 20 और 30 चाहिए यानि कि 50 सालों के बाद मोह नहीं रहता है। सीमा सुरक्षा पर जाना है तो जोश चाहिए, डॉक्टर के पास जाना है तो फीस चाहिए और अगर गुरु के पास जाना है तो शिश चाहिए।
रामचरितमानस ग्रंथ को कुछ चौपाईयों को लेकर कड़े शब्दों का प्रहार करते हुए कहा कि हिंदू धर्म के कुछ पाखंडी लोग मांस खाते हैं और शराब पीते हैं और इस में भी राजनीतिक करते हैं और रामचरितमानस ग्रंथ को आग में जलाते हैं ऐसे लोग सनातनी हिन्दू नहीं हो सकते। ऐसे लोग हमारे दिलों में राम नाम लिखा हुआ है उसे नहीं जला सकते। गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में श्री लक्षानंद महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिन जिन लौकिक या पारलौकिक सुखों को व्यक्ति चाहता है उसे आत्मज्ञ गुरु की पूजा कर प्राप्त कर सकता है। एक सच्चे गुरु का आशीर्वाद हमें आत्मज्ञान की ओर ले जाता है, हमारी आत्मा को प्रकाशित करता है और हमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। हनुमंतिया के संत भंवरलाल महाराज, पंडित गोविंद अल्हेड,संत भंवरलाल महाराज अल्हेड, मारवाड़ मालवा के संत किशोर दास उज्जैन, पंडित दीपक जोशी उज्जैन आदि कई संत, पंडित धर्म मंच पर मौजूद थे। ग्राम राबडिया में बांकेश्वरी माता जी मन्दिर परिसर में आयोजित गुरु पूर्णिमा सत्संग महोत्सव समारोह में बैंगलोर, चेन्नई,नागोर,ब्यावर, भिलाई, उज्जैन, देवास सहित 4 राज्यों के 10 जिलों से बड़ी संख्या में गुरु भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। सभी गुरु भक्तों ने बारी-बारी से गुरु चरण पादुका पूजन अभिषेक कर शाल श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर भजन कीर्तन, हवन पूजन,चरण पादुका पूजन, अभिषेक, महाप्रसाद भण्डारा सहित कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
गुरु पूर्णिमा पर्व पर जीरन मार्ग पर झील में स्थित अतिप्राचीन रामझर महादेव मंदिर पर बड़े ही धूमधाम से धार्मिक महोत्सव मनाया गया। जहां गुरु भक्तों द्वारा चरण पादुका पूजन अभिषेक कर गुरु के चरण वंदन कर शाल श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।इस मौके पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं ने विशाल भण्डारे में महाप्रसाद ग्रहण की।