इंदौर। श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति का साप्ताहिक कार्यक्रम सृजन विविधा शुक्रवार को समिति के सभागार में राष्ट्रप्रेम की रचनाओं के साथ संपन्न हुआ। संयोग से कारगिल विजय दिवस होने से रचनाकारों ने अपनी रचनाएं शहीदों को समर्पित की, जिनकी वीरता, त्याग और बलिदान से भारत ने विजय प्राप्त की थी।
इस सृजन विविधा कार्यक्रम में हरेराम वाजपेयी की रचना ‘हे देशभक्त, हे राष्ट्रभक्त, शत शत नमन’, दिनेश तिवारी उपवन ‘मेरे भारत का लाल, देश के खातिर हो गया बलिदान, गोपाल माहेश्वरी ‘जै महाकाल, कालों के बनकर काल चले, भारत माता के वीर लाल’, संतोष त्रिपाठी, ‘सैनिक का रक्त, आंसू से लिपटे शब्दों को बेटी कैसे पढ़ पाए इतनी मार्मिक थी कि श्रोताओं के आंखों में आंसू आ गए। कल्याणी गुप्ता, ‘करी जब तुमने जंग की तैयारी माथे पर मां ने तिलक लगा नजर उतारी’, शीला चंदन के ‘भाव जीत का सेहरा बांधे बेटा तिरंगे में लिपट कर आया....। वरिष्ठ कवियित्री राधिका इंगले ने मराठी सह हिंदी अनुवाद सहित वास्तविक और मार्मिक रचना सुनाई कि किस प्रकार से उनके परिवार के जवान बेटे युद्ध में शामिल हुए थे। इस अवसर पर युवा यश वंसोडे ने वर्षा ऋतु, दिलीप नेमा ने हरियाली एवं किशोर यादव ने राष्ट्र भक्तिपूर्ण रचना सुनाई। सुधीर लोखंडे, बालकराम साद, राजेश शर्मा, डॉ. अर्पण जैन, घनश्याम यादव, लोंदवाल आदि काफी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।
कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. सुरेंद्र नारायण सक्सेना की कृति ‘मोहे तो मोरे कवित्त बनावत’ का विमोचन किया गया। उन्होंने कृति के बारे संक्षेप में बताया। साथ ही जीवनी और आत्मकथा विधाओं के लक्षण तथा अंतर पर प्रकाश डाला। संचालन कर रही साहित्य मंत्री डॉ. पद्मा सिंह ने कहा कि साहित्य को साधना समझकर लिखना चाहिए। कविता में कवि का दर्शन होना चाहिय। अंत में आभार प्रधानमंत्री अरविंद जवलेकर ने माना। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।