भोपाल। पदोन्नति के बदले में शिक्षकों को उच्च पद का प्रभार देने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें रोज नई विसंगति सामने आ रही हैं। अब पता चला है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने बगैर किसी नोटिफिकेशन के काउंसिलिंग के नियम बदलकर माध्यमिक शिक्षक के लिए बीएड अनिवार्य कर दिया है। इससे हजारों शिक्षक काउंसिलिंग प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। शासकीय शिक्षक संगठन ने इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि पिछले साल बीटीआई और डीएड योग्यताधारी शिक्षकों को उच्च पद के प्रभार की प्रक्रिया में शामिल किया गया था पर वर्तमान में चल रही काउंसिलिंग प्रक्रिया में बीएड प्रशिक्षण योग्यता अनिवार्य कर दी गई है। इस कारण माध्यमिक शिक्षक उच्च पद के प्रभार की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाएंगे। कौशल ने कहा है कि बगैर नोटिफिकेशन काउंसिलिंग नियमों में संशोधन करना शिक्षक संवर्ग के साथ अन्याय है। संगठन ने मांग की है कि पिछले वर्ष की भांति वर्तमान में उच्च पद के प्रभार प्रक्रिया की काउंसिलिंग कराई जाए। ऐसा नहीं हुआ तो काउंसिलिंग की विसंगतियों को लेकर संगठन कोर्ट जाएगा।
प्रधान अध्यापक प्राइमरी-मिडिल की प्रक्रिया में भी विसंगति
प्रधान अध्यापक प्राथमिक को समकक्ष पद उच्च श्रेणी शिक्षक और प्रधान अध्यापक मिडिल को समकक्ष पद व्याख्याता पर उच्च पद का प्रभार दिया जा रहा है, जो विसंगतिपूर्ण है। प्रधान अध्यापक को प्रधान अध्यापक मिडिल के पद और प्रधान अध्यापक मिडिल को प्राचार्य हाईस्कूल के पद का प्रभार दिया जाना चाहिए।