भोपाल। उच्च पद का प्रभार देने को लेकर प्रदेश के सभी जिलों में चल रही काउंसिलिंग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत जनशिक्षक और विकासखंड अकादमिक समन्वयक को शामिल न करने से नाराज शासकीय शिक्षक संगठन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी नवीन शैक्षणिक संवर्ग के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर रहे हैं।
संगठन ने कहा कि इन शिक्षकों को उच्च पद का प्रभार देने के मामले में कई पेंच लगा दिए गए हैं। इससे पहले क्रमोन्नति को लेकर शिक्षकों से भेदभाव हो रहा है। क्रमोन्नति के आदेश अक्टूबर 2023 में दिए जा चुके हैं, पर शिक्षकों को क्रमोन्नति नहीं दी जा रही है। जिससे उन्हें प्रतिमाह हजारों रुपए का नुकसान हो रहा है। उच्च पद के प्रभार के मामले में सितंबर 2023 तक शैक्षणिक योग्यता में न तो जिला शिक्षा अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता थी और न ही व्यावसायिक योग्यता में बीटीआई व डीएड के स्थान पर बीएड मांगा जा रहा था। इतना ही नहीं, उच्च पद प्रभार की काउंसलिंग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत जनशिक्षक, विकासखंड अकादमिक समन्वयक को शामिल करने पर रोक थी।
विभाग के भोपाल में बैठक अधिकारी कभी मौखिक, तो कभी लिखित निर्देश देकर नवीन शिक्षक संवर्ग के उच्च पद के प्रभार प्रक्रिया में नए-नए नियम लागू कर रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इस प्रक्रिया को जबरिया विवादित बनाया जा रहा है। जबकि जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों में पदस्थ नवीन शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों की प्रक्रिया निर्दाेष तरीके से पूर्ण की जा रही है।
संगठन ने कहा कि 29 जुलाई को प्रदेशभर माध्यमिक शिक्षक से उच्च माध्यमिक शिक्षक के लिए आयोजित काउंसिलिंग में जनशिक्षक एवं विकासखंड अकादमिक समन्वयक को शामिल न करने के निर्देश देने के निर्देश अधिकारियों ने जारी कर दिए। जबकि दो दिन पहले ही डीपीसी सर्व शिक्षा अभियान, एपीसी रमसा सहित प्रतिनियुक्ति के अनेक अधिकारियों को न केवल उच्च पद का प्रभार दिया, बल्कि उसी पद पर रखते हुए उच्च पद का नाम भी दिया है।