रतलाम। गेंहू फसल में संतुलित मात्रा में उर्वरक का उपयोग करने के लिये डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक सबसे अच्छा विकल्प है। बाजार में एनपीके विभिन्न विकल्प 12:32:16, 10:26:26 एवं 16:16:16 के साथ 20:20:00:13 के नाम से उपलब्ध है।किसान भाई बुआई के समय एनपीके से फसलो में संतुलित मात्रा में पोशक तत्व आधार रूप से पौधों को उपलब्ध हो जाते है। इसके उपयोग से अलग से अन्य उर्वरक की मात्रा देने की आवश्यकता नहीं होती है। संतुलित उर्वरक के उपयोग से उत्पादन लागत में कमी होती है और साथ की उत्पादकता में वृद्धि होती है। किसान भाई डीएपी उर्वरक के स्थान पर एनपीके उर्वरक का उपयोग करें। भारत सरकार द्वारा मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा रहे एवं वातावरण प्रदूषित न हों को ध्यान में रखकर नेनो यूरिया एवं नेनो डीएपी की सलाह दी जाती है इसके लिये किसान भाईयो को यह भी सलाह है कि गेहूं फसल में दूसरी एवं तिसरी सिंचाई में दानेदार यूरिया के स्थान पर नैनो यूरिया (तरल) का उपयोग करें। इससे कृषि में लागत भी कम होगी और उत्पादन में अपेक्षाकृत वृद्धि होगी।उप संचालक कृषि नीलम सिंह चौहान द्वारा अवगत कराया गया कि जिलें में यूरिया 4498 मेट्रिक टन, डीएपी 2540 मेट्रिक टन एवं काम्प्लेक्स 1939 मेट्रिक टन की उपलब्धता है। अतः किसान भाई संतुलित उर्वरको का उपयोग करें।सूचना पत्र जारीजिले में गठित दल द्वारा सतत निरीक्षण किए जा रहे है, उर्वरक फर्म मेसर्स अमित ट्रेडर्स, रतलाम, मेसर्स माहवीर एग्रो एजेंसी, रतलाम तथा मेसर्स कमलेश कुमार नंदकिशोर राठौर बाजना को निरीक्षण में पाई गई अनियमितता पर उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया।