चित्तौड़गढ़। खेती में लागत को कम करके किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकते है जो की श्रम साध्य यंत्रों के उपयोग के माध्यम से संभव हो सकता है। उक्त विचार कट्स एवम महाराणा प्रताप कृषि एवम प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय उदयपुर के सहयोग से पारसोली में आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण के दौरान डाक्टर हेमू राठौड़ ने व्यक्त किए।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा लघु एवं सीमांत कृषक परिवारों में कृषि मशीनरी को बढ़ावा देने हेतु व कृषि में श्रम साध्य साधनों के उपयोग पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन चित्तौड़गढ के ग्राम पारसोली मे किया गया। प्रशिक्षण के आरम्भ में डॉक्टर सांवल सिंह मीना कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय ने कृषि में यंत्रों के उपयोग पर व्याख्यान दिया उन्होने खेती में बैल चलित और ट्रैक्टर चलित यंत्र को श्रम को कम कर सकते है, उनके बारे में विस्तार से जानकारी दी। डाक्टर हेमू ने महिला किसानों के द्वार खेती में उन्नत दरांती, मक्का छीलक यंत्र, मूंगफली छीलकयंत्र, ट्रांस्प्लान्टर, वेजीटेबल पिकिंग बैग, सोलर हेट, अंगुली मे पहने जाने वाली सब्जी कटर आदि यंत्रों के उपयोग के बारे में जानकारी दी।
उचित समय पर कृषि कार्याे को सम्पन्न करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रो का उपयोग करना आवश्यक हो गया है। इनके कृषि में उपयोग से मानव श्रम न्यूनतम हो जाता कृषि यंत्रों के उपयोग से कृषि कार्यों में लगने वाले श्रम व समय को 20-30 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त उर्वरकों, बीजों व रसायनों पर होने वाले खर्च मेें भी तकरीबन 15-20 प्रतिशत की कमी आ जाती है।
प्रोग्राम ऑफिसर, डॉ. आदर्श शर्मा ने बताया की यह प्रशिक्षण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा प्रयोजित परियोजना के अन्तर्गत आयोजित किया गया व इस प्रशिक्षण में कुल 30 कृषको ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में राजदीप पारीक, ने सभी का अभिंदन व्यक्त किया इस दौरान, अनुष्का तिवारी, यंग प्रोफेशनल, मदनगिरी गोस्वामी, गायत्री मोड सर्वहितेषी किसान उत्पादक संगठन के सीईओ शिवलाल लोहार कमलेश कुमार धाकड़ आदि उपस्थित रहें।