नीमच। देश के अमर वीर शहीदों के आत्म-बलिदान को नमन कर कृतज्ञता प्रकट करना तथा उनके परिजनों को सर्वाेपरि सम्मान देना, प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है, क्योंकि वीरों के बलिदान में परिवार का अति महत्वपूर्ण योगदान होता है। हमारी आने वाली युवा पीढ़ी को वीरों की शहादत के प्रति गौरव की अनुभुति होनी चाहिए। यह सबके लिए प्रेरणास्त्रोत है और उनका जज्बा आज के युवाओं में देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना पैदा करता है। स्मरण रहे कि कर्तव्य की बलि वेदी पर अपने प्राणों को सर्वस्व न्यौछावर करने वाले मध्यप्रदेश के रतलाम शहर के निवासी सीआरपीएफ के अमर वीर बलिदानी सिपाही चम्पालाल मालवीय तथा राजगढ़ जिले के ग्राम शहीदा बाग निवासी सिपाही अम्बाराम मालवीय ने वर्ष 2013 में क्रमशः 112 बटालियन व 133 बटालियन में तैनाती के दौरान आज ही के दिन झारखण्ड के लातेहार जिले के बरडी थाना क्षेत्र में अमवतिकर इलाके में माओवादियों से डटकर मुकाबला करते हुए माँ भारती की सेवा में अपने प्राणों को आहुति दी थी।
इसी कडी में सीआरपीएफ मुख्यालय, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में ग्रुप केन्द्र, सीआरपीएफ, नीमच द्वारा अप्रतिम पहल करते हुए उन शहीदों की पुण्य तिथि पर उनके स्मरण तथा शहादत को नमन करने हेतु मंगलवार को ग्रुप केन्द्र सीआरपीएफ नीमच के डीआईजी श्री राम कृष्णस के कुशल मार्गदर्शन एवं क्रमशः उप निरीक्षक इन्द्रा सन सिंह तथा उप निरीक्षक शंभू राम स्वामी के नेतृत्व में सीआरपीएफ ने वीर बलिदानी के गृह निवास पहुँचकर शहीद के सम्मान में उनके गृह निवास पर कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस मौके पर रतलाम के स्थानीय विधायक मथुरा लाल धामर, सरपंच मीराबाई गोस्वाामी, एसएचओ विष्णु दयाल जोशी तथा राजगढ़ के नगर निगम उपाध्यकक्ष निलेश वर्मा, सरपंच कैलाश, एसएचओ रामेश्वरर मिश्रा सहित स्थानीय गणमान्य नागरिक तथा परिजनों की सादर उपस्थिति में, सीआरपीएफ की ओर से श्रद्धासुमन अर्पित कर दो मिनट का मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना करते हुवे उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की गई। सीआरपीएफ द्वारा वीर बलिदानी के परिजनों को आश्वासित किया गया कि वे सीआरपीएफ परिवार का अभिन्न हिस्सा है और साथ ही उन्हे यह भी भरोसा दिलाया गया कि उनके हरेक सुख-दुख में सीआरपीएफ सदैव उनके साथ खडी है और सीआरपीएफ इन वीर बलिदानियों के परिवाजनों के हर संभव सहयोग व सहायता के लिए हमेशा तत्पर है। शहीद के परिजनों के प्रति अपनत्व एवं कृतज्ञता प्रकट करना एवं उन्हें खुशहाल देखना ही सही मायने में शहीदों के प्रति सम्मान है।