शिवपुरी। नगर परिषद खनियाधाना में आयोजित परिषद की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक के एजेंडे में शामिल 18 बिंदुओं में से 14 बिंदुओं पर चर्चा के बाद अचानक विवाद हो गया। विवाद उस समय बढ़ा, जब खलक सिंह पार्क को तोड़कर उस स्थान पर बनाई गई 22 दुकानों और उनकी नीलामी को लेकर चर्चा शुरू हुई। बैठक में हंगामे के बाद नगर परिषद अध्यक्ष छाया साहू ने बैठक को निरस्त कर दिया और वह वहां से उठकर चली गईं। इसके बाद नाराज पार्षदों ने नगर परिषद में तालाबंदी कर दी।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर हंगामा -
बैठक के दौरान भाजपा पार्षदों ने नगर परिषद अध्यक्ष छाया साहू पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों का कहना था कि खलक सिंह पार्क को बिना स्वीकृति तोड़कर वहां 22 दुकानें बनाई गईं, जबकि पार्षदों ने केवल गायत्री मंदिर के पास मार्केट बनाने की सहमति दी थी। पार्षदों ने कहा कि इन दुकानों को आधा-अधूरा बनाकर अब नीलामी की स्वीकृति देने की कोशिश की जा रही है। पार्षदों का आरोप है कि यह सब भ्रष्टाचार की मंशा से किया गया है। नगर परिषद अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी की ओर से नगर परिषद अध्यक्ष बने थे लेकिन विधायक भाजपा का बनने के बाद अध्यक्ष पद बचाने के लिए कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था सूत्रों की मानें तो देखने दिखाने के लिए अभी भी भाजपा के है लेकिन अभी भी अध्यक्ष का कांग्रेस से संबंध है और पूर्व विधायक केपी सिंह के इशारे पर ही चलते है और नगर परिषद अपने अनुसार चलाते हैं।
विधायक प्रतिनिधि से भी बदसलूकी का आरोप -
बैठक में विधायक निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों को लेकर भी चर्चा हो रही थी। पार्षदों का कहना है कि खनियाधाना विधायक प्रतिनिधि भानू चौधरी ने समान रूप से भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में विकास कार्यों के लिए 10-10 लाख रुपये स्वीकृत कराए थे। जब इन कार्यों पर चर्चा की बात आई तो अध्यक्ष छाया साहू ने विधायक प्रतिनिधि से बदसलूकी की और उन्हें चुप बैठने को कहा। इसके बाद बैठक में माहौल गर्मा गया और अध्यक्ष बैठक से उठकर चली गईं।
अध्यक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद -
नगर परिषद अध्यक्ष छाया साहू ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि बैठक में महिला पार्षदों की जगह उनके पति आकर बैठ गए थे। वे एजेंडे के बिंदुओं और नगर विकास पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक बहस करने लगे। इसी वजह से बैठक को निरस्त करने की घोषणा करनी पड़ी।
पांच महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं -
बैठक के दौरान नगर परिषद कर्मचारियों को पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिलने का मुद्दा भी छाया रहा। पार्षदों ने इस मुद्दे पर अध्यक्ष से जवाब मांगा, लेकिन वे इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाईं। सीएमओ ने कहा कि नगर परिषद की आय कम होने के कारण कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद के आर्थिक हालात खराब हैं, फिर भी अनावश्यक रूप से निर्माण कार्यों के लिए पैसा खर्च किया जा रहा है।