मोरवन। मध्यप्रदेश शासन वन विभाग मध्यप्रदेश ईको पर्यटक विकास बोर्ड के समन्वय से वन परिक्षेत्र जावद,सामान्य वन मंडल नीमच द्वारा, समीपस्त ग्राम पंचायत मांडा के अंतर्गत आने वाला जंगल वानर खो (महेंद्री) में वन्यप्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से बुधवार को एक अनुभूति कार्यक्रम (ईको कैंप) आयोजित किया गया, जिसमें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जनकपुर मोरवन के 130 छात्र-छात्रा जावद क्रमांक 2 के 20 विद्यार्थियों व अध्यापकों ने भाग लिया। उक्त शिविर के आयोजन के प्रमुख उद्देश्य है रू-स्कूली विद्यार्थियों को वन वन्य प्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अनुभूति कराकर उनके संरक्षण हेतु जागरूक करना एवं सहभागिता हेतु प्रेरित करने के साथ-साथ वन विभाग एवं अधिकारियों उत्तरदायित्व एवं चुनौतियों से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से विद्यालयों के विद्यार्थियों अर्थात् भविष्य के नागरिकों को वन, वन्यप्राणी एवं पर्यावारण की अनुभूति कराकर, उन्हें उनके संरक्षण हेतु जागरूक एवं प्रेरित करना, विभाग एवं विभागीय अधिकारियों के कार्याे, उत्तरदायित्वों एवं चुनौतियों से विद्यार्थियों को अवगत कराना था।स्कूल के बच्चों को अनुभूति कार्यक्रम के प्रेरक अशोक बैरागी और पुष्पेंद्र चौहान ने मध्य प्रदेश के वनों में पाई जाने वाली वनस्पति के बारे में रोचक जानकारी तथा उनके दैनिक जीवन में उपयोगों की जानकारी दी, वनों की सुंदरता बढ़ाने वाले पक्षियों ओर वन्य प्राणियों की जानकारी दी। वहीं इस पृथ्वी पर वर्तमान में मौजूद सबसे पुराने जीव ष्मगरमच्छ ष्जो लगभग 50 करोड़ वर्ष से है की जानकारी दी। चार प्रकार के विषैले सांपों से बचने ओर सांपों के विषय में प्रचलित भ्रांतियों को दूर किया।विद्यार्थियों की टोली बनाकर वन विहार कराया गया जिसमें औषधीय के बारे में वनस्पतियों के बारे में साथ ही वन विभाग द्वारा वर्तमान में मिट्टी संरक्षण जल संरक्षण के लिए किए जा रहे वानिकी कार्यों के बारे में भी डेमो वर्क के माध्यम से जंगलों में जल संरक्षण कैसे किया जाता है आदि की जानकारी दी। साथ ही कार्यक्रम में खेलों के साथ-साथ सामान्य ज्ञान परीक्षा का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रथम द्वितीय तृतीय आने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप उपहार व प्रशंसा पत्र दिए गए।
कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर के रूप में वन विभाग के एचडीओ दशरथ अखंड व जावद रेंजर विपुल प्रभात ने संभाली। इस दौरान जिला डीएफओ शिव करण अटोदे वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी समीप पंचायतों के सरपंच सचिव पटवारी वन समिति के अध्यक्ष चौकीदार सहित ग्रामीण भी उपस्थित रहे।
जावद एसडीओ दशरथ अखंड ने अनुभूति कार्यक्रम में वन्यप्राणी व पर्यावरण से संबंधित रोचक गतिविधियाँ व जानकारी प्रदान कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों को वन्यप्राणियों को कैसे रेस्क्यू किया जाता है द्वारा अवगत कराया गया साथ ही एसडीओ द्वारा बताया गया कि वन विभाग में किस तरह एक वनरक्षक की भर्ती होती है और एक वनरक्षक किस तरह उच्च पदों पर पहुंचता है साथ ही उन्होंने बताया कि कम से कम पॉलिथीन का उपयोग करें जिस प्रकार हम अपने घरों में दूध की थैली का इस्तेमाल करते हैं तो उसे थैली को इधर-उधर ना फेंक कर कहीं पर स्टोर करें और इसकी जानकारी हमें दें यह पॉलिथीन आपके घर से ले जाकर इसके अंदर मिट्टी डालकर अंकुरित बीच से एक पौधा तैयार कर वनों में लगाएंगे जिससे वन संरक्षण किया जा सके साथ ही उन्होंने बताया कि जब हम बाजार में सब्जी सामान लेने जाते हैं तो पॉलिथीन का उपयोग करते हैं उसका उपयोग ना करते हुए कपड़े की थैली का उपयोग करें वह महिलाएं मुंह बांधने के स्टॉल से भी थैली बनाकर सब्जी सामान अपने घर ले जा सकती है कागज से थैली बनाना व कपड़े के स्टॉल से कैसे थैली बनाते हे उसका प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत जावद क्षेत्र के विधायक ओमप्रकाश सकलेचा व वन विभाग के डीएफओ शिवकरण अटोदे में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत करी। विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने बच्चों को संबोधित करते हुए बच्चों से वन संरक्षण व संवर्धन के लिए बच्चों से संवाद किया साथ ही उन्होंने बच्चों से कहा कि आज हम जो भी यहां से सीख कर जा रहे हैं उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे। उन्होंने आगे बताया कि अनुभूति हम है बदलाव एक आव्हान है जो हमें आत्म निर्भरता और समुदाय की शक्ति में विश्वास दिलाता है यह हमें बताती है कि सामूहिक रूप से किए गए प्रयास सबसे प्रभावी होते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों का उत्साह देखते हुए विधायक ने कार्यक्रम में हुए खेलकूद व प्रतियोगिता में जो प्रथम सेकंड थर्ड स्थान में आए हैं उन्हें एक एक हजार रुपए पुरस्कार के रूप में देने घोषणा करें।
अंत में कार्यक्रम में सम्मिलित बच्चों को शपथ दिलाई गई एवं पुरस्कार तथा प्रमाण पत्र वितरण कर सहभोज कर कार्यक्रम का समापन हुआ।