नीमच। स्वामी विवेकानंद शासकीय स्ना. महाविद्यालय,नीमच में दिनांक 22 मार्च 2025 12:30 बजे रूसा भवन में "Cyber Threats in the Digital Age: Awareness and Prevention"विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता:- विकास कुमार पांडेय असिस्टेंट कमांडेंट (सीआरपीएफ़ नीमच) विशिष्ठ वक्ता डॉ.पुष्पेन्द्र नरुका (वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक,कृषि विकास केंद्र नीमच ) रहे कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ.प्रशांत मिश्रा द्वारा,अतिथियों का परिचय देते हुए कार्यक्रम संयोजक लेफ़्टिनेंट डॉ महेंद्र कुमार शर्मा ने सीआरपीएफ़ नीमच और कृषि विकास केंद्र नीमच संस्थाओं के प्रति महाविद्यालय की ओर से आभार व्यक्त किया ,कार्यक्रम का संचालन भूनेश अम्बानी (सहायक प्राध्यापक गणित ) द्वारा किया गया l
डिजिटल युग ने अद्वितीय सुविधा और कनेक्टिविटी लाने के साथ-साथ साइबर अपराध में भी समानांतर और खतरनाक वृद्धि देखी है :विकास कुमार पांडेय मुख्या वक्ता विकास कुमार पांडेय द्वारा बताया गया कि डिजिटल युग ने अद्वितीय सुविधा और कनेक्टिविटी लाने के साथ-साथ साइबर अपराध में भी समानांतर और खतरनाक वृद्धि देखी है। इस वृद्धि का श्रेय दुनिया भर में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती पहुंच को दिया जाता है,जिससे अधिक व्यक्ति और संगठन साइबर खतरों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। साइबर अपराध में पहचान कीचोरी,वित्तीय धोखाधड़ी,हैकिंग,साइबरस्टॉकिंग और हानिकारक सॉफ़्टवेयर के वितरण सहित कई तरह की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियाँ शामिल हैं।
इनके अतरिक्त साइबर आतंकवाद,फ़िशिंग जिसका उपयोग हमलावरों द्वारा व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने के लिए नकली संचार का उपयोग करना,विभिन्न प्रकार के वायरस अटैक मैलवेयर स्पाईवेयर,रैंसमवेयर और अन्य मैलवेयर जो कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं
साइबर अपराधों से बचने हेतु निम्न सुरक्षा उपाय भी श्री पाण्डेय द्वारा बताये गए जैसे नेटवर्क सुरक्षा: नेटवर्क आर्किटेक्चर,वायरलेस एक्सेस पॉइंट,सर्वर,होस्ट,फायरवॉल और नेटवर्क प्रोटोकॉल में खामियों को ठीक करना ,क्लाउड सिक्योरिटी ,एंडपॉइंट सुरक्षा,मोबाइल सुरक्षा,लोगों को साइबर सुरक्षा खतरों और बचाव के बारे में जागरूक करना l कृषि के परंपरागत तौर-तरीके में बदलाव जल संरक्षण की नीवं साबित होगा :वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकडॉ.पुष्पेन्द्र नरुका विशिष्ठ वक्ता वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ.पुष्पेन्द्र नरुकाद्वारा विद्यार्थियों को विश्व जल दिवस पर “जल है तो कल है”पंक्तियों के साथ अपने व्यख्यान को प्रारम्भ करते हुए जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया,बिसलरी और गेंहू के पौधे का उदहारण देकर जल के महत्व को बतायातथा डॉ.नरुका का कहना है किकृषि के परंपरागत तौर-तरीके में बदलाव ही जल संरक्षण की नीवं साबित होगा Iडॉ.नरुका का कहना है कि संभवतः चौथा विश्व युद्ध जल को लेकर होगाlविश्व जल दिवस- जल संरक्षण को लेकर महाविद्यलय के एन सी सी कैडेट्स द्वारा पोस्टर भी बनाये गए lकार्यक्रम में उपस्थित रहे सभी का आभार डॉ.अशोक कुमार लक्षकार द्वारा किया गया l