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July 5, 2026, 4:04 pm
KHABAR : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण का विरोध, संगठन बोले- सरकार बजट बढ़ाने पर ध्यान दे, पिछले महीने ही कैबिनेट से मिली थी मंजूरी, पढे़ खबर

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भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को निजी हाथों में सौंपने का स्वास्थ्य संगठनों ने विरोध किया है। स्वास्थ्य कर्मियों, डॉक्टरों और जनस्वास्थ्य संगठनों ने सरकार से फैसला तुरंत वापस लेने की मांग की है। भोपाल में रविवार को एक प्रेसवार्ता में संगठनों ने कहा कि निजीकरण नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। यदि इसे वापस नहीं लिया, तो हमारे पास केवल आंदोलन ही विकल्प है।


दरअसल,एमपी सरकार ने ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए ब्भ्ब् को निजी संस्थाओं को सौंपने का फैसला किया है।


हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। शुरुआती चरण में रीवा, देवास और गुना जिलों के कुल 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इसी का सभी संगठन विरोध कर रहे हैं।


एमपी मेडिकल ऑफिसर्स एसो. के अध्यक्ष डॉ. आनंद शर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश पहले से ही मातृ मृत्यु दर के मामले में पीछे है। यदि सरकार स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण का फैसला लागू करती है तो स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने सरकार से यह फैसला तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब भी सरकार किसी विभाग का निजीकरण करती है, तो आगे चलकर वहां भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए वे सरकार के इस फैसले के विरोध में हैं।


एमएलसी और पोस्टमार्टम पर उठाए सवाल
मध्य प्रदेश मेडिकल टीचर्स एसो. के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी), पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच जैसे कई जरूरी काम होते हैं।


उन्होंने कहा कि इनकी रिपोर्ट अदालत में भी पेश की जाती है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि ये केंद्र निजी हाथों में चले गए तो इन प्रक्रियाओं की निष्पक्षता की गारंटी कौन देगा। सरकार को इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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