चित्तौड़गढ़। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ में आयोजित 21वें कल्याण महाकुंभ के पांचवें दिन रविवार को ठाकुरजी के राजाधिराज स्वरूप और भगवान जगन्नाथ के 56 भोग की भव्य झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। रंग-बिरंगे फूलों से सुसज्जित वेदपीठ परिसर और ठाकुरजी के अलौकिक श्रृंगार ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।
भव्य शोभायात्रा के साथ पहुंचे 56 भोग-
पुरी परंपरा के अनुसार तैयार किए गए 56 भोग को नौ ऊंटों एवं बैलगाड़ियों के माध्यम से कल्याण लोक से वेदपीठ लाया गया। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। वेदपीठ पहुंचने पर यजमानों, वीरांगनाओं और बटुकों ने भोग को श्रद्धापूर्वक मंदिर में अर्पित किया।
51 कुंडीय अतिरुद्र महायज्ञ में 500 युगलों ने दी आहुतियां-
महाकुंभ के अंतर्गत आयोजित 51 कुंडीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ में लगभग 500 युगल यजमानों ने गोघृत एवं शाकल्य की आहुति देकर सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की कामना की। भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने यज्ञ की महिमा बताते हुए कहा कि यज्ञ से प्रकृति संतुलित होती है और समस्त देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
भवाई नृत्य और भजनों ने बांधा समां-
संध्या आरती के बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार लक्ष्मीनारायण रावल एवं उनके दल ने भवाई नृत्य, गणेश वंदना और वीर रस व भक्तिरस से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुतियों पर देर तक तालियां गूंजती रहीं।
गुरु ही साक्षात शिव का स्वरूप : शंकराचार्य
विश्वरूपम कथा मंडप में श्री लिंग महापुराण कथा के दौरान शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने कहा कि गुरु ही साक्षात भगवान शिव का स्वरूप हैं। गुरु की आज्ञा का पालन, पंचाक्षरी मंत्र 'नमः शिवाय' का नियमित जप और शिवभक्ति ही आत्मबोध एवं मोक्ष का मार्ग है। उन्होंने गुरु महिमा, सत्संग, धर्माचरण तथा मंत्र साधना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा के दौरान सांसद सी.पी. जोशी, विधायक चंद कृपलानी, अशोक नवलखा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने व्यासपीठ की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
आज होगी रोहित भूषण मिश्रा की भजन संध्या-
महाकुंभ के अंतर्गत सोमवार को आयोजित भजन संध्या में इंदौर के सुप्रसिद्ध भजन गायक रोहित भूषण मिश्रा एवं उदयपुर की त्रिशा सुथार अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर करेंगे।