भोपाल। भारतीय लोक कला जगत के लिए रविवार का दिन बेहद दुखद रहा। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। उनके निधन से देशभर के कला प्रेमियों और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला, ओजस्वी प्रस्तुति और लोक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
डॉ. तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही महाभारत पर आधारित पंडवानी गायन की शिक्षा प्राप्त की और पुरुष प्रधान मानी जाने वाली कापालिक शैली में प्रस्तुति देकर अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी प्रभावशाली आवाज और मंचीय प्रस्तुति के दम पर उन्होंने पंडवानी कला को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।
भारतीय लोक संस्कृति के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्मभूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए।
डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। हालांकि, अपनी कला और विरासत के माध्यम से वे आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेंगी।