गुना। जिले के धरनावदा थाना क्षेत्र में बिजली बिल की वसूली के दौरान उपभोक्ता से मारपीट और जातिसूचक गालियां देने के मामले में आरोपी रिटायर्ड बिजली कर्मचारी की अग्रिम जमानत याचिका जिला अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।
मामला 15 अक्टूबर 2025 का है। फरियादी रामदयाल ने पुलिस को बताया कि वह दोपहर करीब 3 बजे चिल्का पुलिया के पास स्थित अपने खेत पर था। इसी दौरान बिजली विभाग की टीम पहुंची और खेत में लगे ट्रांसफार्मर (डीपी) का बकाया बिल तत्काल जमा करने को कहा। टीम ने चेतावनी दी कि भुगतान नहीं होने पर डीपी उतारकर ले जाया जाएगा।
रामदयाल ने बताया कि उसने घर से पैसे लाने तक इंतजार करने की बात कही। इसी दौरान विभाग के अधिकारी पियूष चौधरी ने कहा कि डीपी पर तीन उपभोक्ताओं के कनेक्शन हैं और तीनों का बकाया जमा होने पर ही ट्रांसफार्मर नहीं हटाया जाएगा।
मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप
रामदयाल के अनुसार, कुछ देर बाद लाइनमैन विजय सोनी और गार्ड रंजीत सिंह भदौरिया भी मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि तीनों ने जातिसूचक गालियां दीं और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की।
शोर सुनकर उसका भांजा राजेंद्र और धीरेन्द्र मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव करने लगे। आरोप है कि उनके साथ भी मारपीट की गई। जाते समय आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी और ट्रांसफार्मर भी उतारकर ले गए।
रिटायरमेंट के बाद लगाई थी अग्रिम जमानत याचिका
रामदयाल की शिकायत पर धरनावदा पुलिस ने मारपीट, धमकी और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया। इस बीच आरोपी गार्ड रंजीत सिंह भदौरिया सेवानिवृत्त हो गया। उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।