चित्तौड़गढ़। जिले में साहित्य, कला और संस्कृति को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से सृजन रविवार चाय के साथ साहित्यिक संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ रविवार, 5 जुलाई से किया जाएगा। पहला आयोजन दोपहर 3 से 5 बजे तक रितुराज वाटिका, चित्तौड़गढ़ में आयोजित होगा।
21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक अनिल सक्सेना श्ललकारश् ने बताया कि यह आयोजन प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को नियमित रूप से होगा। इसका उद्देश्य साहित्यकारों, कवियों, लेखकों, कलाकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां आत्मीय वातावरण में साहित्य, भाषा, लोककला, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर सार्थक संवाद हो सके।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक आयोजन में काव्य पाठ, कहानी, लघुकथा, ग़ज़ल, गीत, पुस्तक चर्चा, पुस्तक परिचय, पुस्तक विमोचन, युवा रचनाकारों की प्रस्तुतियां, वरिष्ठ साहित्यकारों के अनुभव साझा करने के साथ-साथ समसामयिक विषयों पर खुला संवाद भी आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक माह एक निर्धारित विषय पर विशेष परिचर्चा भी होगी।
अनिल सक्सेना ने कहा कि श्सृजन रविवारश् का उद्देश्य केवल साहित्यिक गोष्ठियों तक सीमित नहीं है, बल्कि चित्तौड़गढ़ की साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक चेतना को सशक्त बनाना तथा वरिष्ठ और युवा पीढ़ी के बीच रचनात्मक संवाद की निरंतर परंपरा स्थापित करना है। यह मंच किसी एक संस्था या विचारधारा तक सीमित न होकर सभी साहित्य, कला एवं संस्कृति प्रेमियों के लिए खुला रहेगा।
कार्यक्रम के संरक्षक शिव मृदुल, सह संरक्षक रमेश मयंक तथा कार्यक्रम समन्वयक अखिलेश श्रीवास्तव ने जिले के साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनने की अपील की है।