चित्तौड़गढ़। कल्याण महाकुंभ के तृतीय दिवस शुक्रवार रात्रि कथा मंडपम में आयोजित अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी ओजपूर्ण, राष्ट्रभक्ति, वीर रस, हास्य और श्रृंगार से सराबोर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों की हर प्रस्तुति पर कथा मंडपम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कवि सम्मेलन में इंदौर के मुकेश मौलवा, इटावा के राम भदावर, वाराणसी की प्रियंका राय, आगरा के सचिन सारंग और सचिन दीक्षित, गाजियाबाद के मोहित शौर्य, अंशुमान आजाद तथा कल्याण नगरी की जया धनगर वेदा सहित अनेक प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता, भारतीय संस्कृति, वीरता, हास्य और श्रृंगार पर आधारित रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
कवि दीपक पारीक ने मेवाड़ के शौर्य का वर्णन करते हुए कहा कि ष्ये मत भूलो कि पुरखों का सम्मान बचाना आता है, मेवाड़ धरा के वीरों को तलवार चलाना आता है।ष् उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने जोरदार तालियां बजाईं।
सचिन सारंग ने सामाजिक एकता और हिंदू समाज में जातिगत भेदभाव खत्म करने का संदेश देते हुए अपनी ओजपूर्ण कविता प्रस्तुत की। वहीं अंशुमान आजाद ने राजस्थान की वीर परंपरा और बलिदान की गौरवगाथा सुनाकर वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया।
प्रियंका राय ने वीर कल्लाजी के अदम्य साहस, स्वाभिमान और बलिदान पर आधारित रचना प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। मोहित शौर्य की जोशीली प्रस्तुति ने भी श्रोताओं में नया उत्साह भर दिया।
देर रात तक चले इस विराट कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। हर कविता के साथ कथा मंडपम तालियों की गूंज से बार-बार गूंजता रहा और पूरा वातावरण साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।