भोपाल। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने विभाग में अधिकारियों की कमी और स्थानांतरण पर प्रतिबंध के कारण रिक्त जनपदों में मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) की नियुक्ति में असमर्थता जताई है। ऐसे में जहां-जहां सीईओ के पद खाली हैं, वहां कब तक नियुक्ति होगी, इसकी समय सीमा बता पाने से भी मंत्री ने इनकार किया है। मंत्री पटेल ने यह जानकारी विधानसभा में विधायक विवेक विक्की पटेल के सवाल के लिखित जवाब में दी। उन्होंने कहा कि विभाग में अधिकारियों की कमी और स्थानांतरण पर प्रतिबंध के कारण जनपद पंचायत खैरलांजी, जिला बालाघाट में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा, ष्इसकी कोई निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है। मंत्री ने यह भी बताया कि जिन जनपद पंचायतों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी नहीं हैं, वहां विकासखंड अधिकारी (बीडीओ) पदस्थ किए गए हैं। ये अधिकारी विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग का कार्य कर रहे हैं। विधानसभा सत्र के दौरान विधायक विवेक विक्की पटेल ने सवाल किया था कि जनपद पंचायत खैरलांजी, जिला बालाघाट में मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पद डेढ़ साल से अधिक समय से रिक्त पड़ा है। विधायक ने कई बार मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखकर सीईओ की नियुक्ति की मांग की, लेकिन अब तक इस पद को भरा नहीं गया। उन्होंने पूछा कि इसमें देरी का कारण क्या है, और सीईओ की नियुक्ति कब तक होगी? इसी तरह का सवाल सत्ता पक्ष के विधायक हरिशंकर खटीक ने भी किया था। इस पर मंत्री पटेल ने जवाब दिया कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) को पत्र भेजकर अधिकारियों की मांग की गई है और रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने के लिए कहा गया है। विधायक ने यह भी पूछा कि किन जनपदों में विकासखंड अधिकारी नियुक्त किए गए हैं? इसके जवाब में मंत्री ने बताया कि इन जनपदों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और विकासखंड अधिकारी (ठक्व्) पदस्थ हैं।