इंदौर। अप्लास्टिक एनीमिया कोई सामान्य बीमारी नहीं है। यह कैंसर से भी अधिक खतरनाक, जानलेवा और बोन मैरो संबंधी समस्या है। इसमें मरीज को बार-बार ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते है। यह कहना है होम्योपैथिक स्पेशलिस्ट डॉ. ए. के. द्विवेदी का। वे इस बीमारी को लेकर सरकार और समाज को जागरूक करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
अप्लास्टिक एनीमिया गंभीर और अलग तरह की बीमारी
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि जब लोग ष्एनीमियाष् शब्द सुनते हैं, तो अक्सर इसे केवल आयरन या विटामिन की कमी से जुड़ी समस्या मान लेते हैं। जबकि अप्लास्टिक एनीमिया एक गंभीर और अलग तरह की बीमारी है। इसमें शरीर का बोन मैरो ब्लड बनाना बंद कर देता है। साथ ही ब्लड सेल्स को भी नष्ट करने लगता है।
इस वजह से यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि समय पर इलाज न मिले तो मरीज की जान भी जा सकती है। इसकी दवाइयां बहुत महंगी होती हैं और इलाज लंबा चलता है। कई मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत भी पड़ती है।
डॉ. द्विवेदी ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र
मरीजों की इसी पीड़ा को देखते हुए डॉ. द्विवेदी ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री को पत्र लिखे है। उनकी इस पहल का सकारात्मक असर हुआ। उन्होंने एक पत्र पढ़ा, जिसे प्रधानमंत्री ने एक अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित मरीज को भेजा था। उस मरीज को प्रधानमंत्री राहत कोष योजना के तहत 3 लाख रुपए की सहायता राशि मिली है।
यह पत्र डॉ. द्विवेदी के लिए प्रेरणा बना है, और अब वे चाहते हैं कि और भी लोग इस योजना के बारे में जागरूक हों और इसका लाभ उठाएं।