उज्जैन। 30 अप्रैल को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग की विशेष स्थिति बन रही है। बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र होने से सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बावाला के अनुसार-
वैशाख मास का विशेष महत्व है। इस माह में भगवान विष्णु और शिव की साधना की जाती है। देवताओं को जल, जलाधिवास और चंदन से प्रसन्न किया जाता है। पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है।
इस दिन व्यापार या व्यवसाय की शुरुआत शुभ मानी गई है। नए वाहन, स्वर्ण, चांदी और देवता की प्रतिमा खरीदने का भी शुभ मुहूर्त है। सामाजिक और पारिवारिक कार्यों की शुरुआत के लिए भी यह समय उत्तम है।
अक्षय तृतीया पर विशेष पूजन विधि का भी महत्व है। भगवान विष्णु और पितरों के निमित्त दो मिट्टी के घड़े जल से भरकर पूर्व दिशा की ओर रखे जाते हैं। विष्णु के घट में जौ और पितरों के घट में काले तिल डाले जाते हैं। दोनों घटों में सफेद मोगरे के फूल रखकर खरबूजे से पूर्ण पात्र बनाया जाता है।
इसके बाद ब्राह्मणों को घट दान किया जाता है। इस दिन पानी की प्याऊ लगाने और पीपल के वृक्ष की सेवा करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे पितरों को मोक्ष और विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।