नीमच। नगर पालिका द्वारा चंद महीनों पहले स्वच्छता अभियान के तहत लगाए गए डस्टबिन जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गए है। बताते चले कि नीमच नगर पालिका द्वारा शहर में साफ सफाई बनाए रखने को लेकर डस्टबिन लगाने का प्रयोग किया गया था। हकीकत की जमीन पर यह प्रयोग बुरी तरह विफल साबित हुआ है।
शहर के कमर्शियल और विभिन्न इलाकों में 273 जगहों पर प्लास्टिक के प्लेटफॉर्म तैयार कर डस्टबिन लगाए गए। जिनकी लागत प्रति सेट लगभग 4000 रूपए आई है। लाखों रुपए की कीमत से लगाए गए डस्टबिनों का कोई औचित्य नहीं निकला। इससे साफ सफाई को लेकर कोई अनुकूल परिणाम हासिल नहीं हुआ। बल्कि यू कहा जाए कि इससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ा तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि जहां-जहां डस्टबिन लगाए गए उनमें से अधिकांश जगह कचरा पॉइंट में तब्दील हो गई। कुछ ही महीनों में डस्टबिन टूट-फूट गए। अनेक डस्टबिन जला दिए गए। कई जगहों पर एक या दोनों डस्टबिन उखाड़ कर ले जाए गए। तोड़फोड़ दिए गए। कहीं-कहीं केवल डस्टबिन के स्टैंड दिखाई दे रहे हैं। लोगों ने डस्टबिन की जगह पर नीचे कचरा फेंकना शुरू कर दिया।
नगर पालिका नीमच के नेता प्रतिपक्ष योगेश प्रजापत का आरोप है कि स्वच्छता के नाम पर एक डस्टबिन घोटाला हुआ है। हल्के, छोटे और घटिया क्वालिटी के डस्टबिन लगाए गए। इन डस्टबिनो को लगाकर नगर पालिका का आर्थिक नुकसान किया गया है। शहर में 200 नए कचरा पॉइंट बना दिए गए। वहीं सभापति धर्मेश पुरोहित ने कहा कि हमारा उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था। शहर को कचरा मुक्त बनाने के उद्देश्य से डस्टबिन लगाए गए थे। लेकिन असामाजिक तत्वों ने इन्हें जला दिया या उखाड़ दिया। इसमें किसी को उपकृत करने जैसी कोई बात नहीं हुई है।