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January 17, 2026, 7:18 pm
BIG NEWS : संवेदनशील फसल अफीम को उपरी हवा से बचाने के लिए टोने टोटके!, अंचल में काले सोने ने ओढ़ी सफेद फूलों की चादर, अब खेतों में कटेगी काश्तकारों की रातें, सुरक्षा के लिए किए इंतजाम, पढ़े दिनेश वीरवाल की खबर 

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सरवानियां महाराज। शहर सहित आसपास के अंचल में इन दिनों काला सोना यानी अफीम की फसल पर सफेद फूलों की चादर बिछ गई है। अफीम फसल की मादक गंध अनायास ही खेतों के पास से निकलने वालों का ध्यान खिंच रही है। अफीम का काश्तकार  फसल की निगरानी मे दिन रात एक किए हुए है।
नीमच मंदसौर मालवा का यह इलाका अफीम काश्त के लिए देश दुनिया में ख्याति प्राप्त है। मालवा मैवाड़़ और निमाड़ में काले सोने पर इस समय फसल में से डोडे निकलने को आतुर है फिलहाल उन डोड़ो को सफेद फूलों ने ढक रखा है। थोड़े बहुत दिनों बाद अफीम फसल के डोड़ो से अफीम निकालने का काम शुरू हो जायेगा। नाणा करने के बाद प्रतिदिन सुबह छरपले से लुवाई की जायेगी तो दिन में नक्का से चिराई का काम किया जायेगा , इसके लिए प्रशिक्षित और कुशल लोगों को अफीम काश्तकारों ने अभी से ही हायर कर लिया है। काश्तकार अफीम फसल की समय-समय पर पानी से सिंचाई व फसल में रोग ना आये इसके लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे है।

बाडर लोहे की जाली से तो छत नेट से कवर-
अफीम के फसल को रोजडो व अन्य जानवरों से बचाव के लिए अफीम के खेतों के चारो तरफ लोहे की जाली से कवर किया गया है तो ऊपर नेट जाली बांधकर पक्षी पक्षियों से अफीम फसल का बचाव किया गया है।अफीम के खेतों मे क्यारियां तैयार करके अफीम पोधौं के बीच मे रेशम डोरी का जाल लोहे के पाइप व डंडो से बांधा गया है ताकी तेज रफ्तार हवा चलने पर फसल सुरक्षित खड़ी रहे।

दिपावली पर बोई गई फसल में खिलें फूल-
अंचल में करीब तीस पट्टे अफीम काश्त के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए हैं जिनमें से जो दिपावली के आस पास पहले बुआई कर चुके हैं उन खेतों में फूलों की बहार आई हुई है। शेष अफीम काश्त में अभी देरी है। कृषक रमेश मालू दिनेश राठौर ने बताया कि अफीम फसल में  मौसम के बदलावों के चलते 10 पर्सेंट के लगभग पीला पन आया है। नाणा जैसी स्थिति के लिए अभी एक माह का समय लगेगा।रोगो से निपटने के लिए कृषि एक्सपर्ट से सलाह लेकर दवाईयां छिड़क रहे हैं। 

संवेदनशील फसल,उपरी हवाओं के लिए करते है टोने टोटक-
अफीम कृषकों के मुताबिक अफीम काश्त बहुत संवेदनशील फसल है बहुत जल्दी बाहरी और उपरी हवाओं के संपर्क में आ जाती है। जिससे बचाव के लिए के काली झंडी,काली मटकी , जूते के टोने टोटके किए जाते हैं ताकि इस सेंसेटिव अफीम फसल पर उपरी हवाओं ( नज़र ) का असर ना हो। वहीं रजस्वला महिलाओं को भी इस फसल से दूर रखा जाता है। फसल के आसपास ओढ़के बिजूका भी खड़े किए जाते हैं।

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