नीमच। जिले के कुकडेश्वर क्षेत्र में पीढ़ियों से चले आ रहे गौ-पालन और खेती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। प्रशासन द्वारा गौ-पालन स्थल हटाने के नोटिस जारी किए जाने से क्षेत्र के गो-पालकों और किसानों में भारी रोष व चिंता व्याप्त है। इस संबंध में समस्त गो-पालक एवं किसानों ने जिला कलेक्टर नीमच को आवेदन सौंपकर न्यायसंगत निर्णय की मांग की है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि सर्वे नंबर 925 की भूमि पर लगभग 100 वर्षों से गौ-पालन, चारा भंडारण, गोबर एवं कच्ची फसल रखने का कार्य किया जा रहा है। खेती और पशुपालन ही क्षेत्रवासियों की आजिविका का मुख्य आधार है। इसके बावजूद 19 जनवरी को उक्त भूमि पर मेला आयोजन के उद्देश्य से गौ-पालन हटाने के नोटिस जारी किए गए, जबकि यह स्थल मेला आयोजन के लिए अनुपयुक्त है और प्रारंभ से ही गौ-संरक्षण के उपयोग में रहा है।
गो-पालकों ने चिंता व्यक्त की कि यदि प्रशासन द्वारा जबरन गौ-पालन हटाया गया, तो सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी प्रभावित होगी और गौ-माताओं का आश्रय उजड़ जाएगा। उन्होंने इस कार्रवाई को मानवीय संवेदनाओं और अधिकारों के विरुद्ध बताया। साथ ही यह भी कहा कि एक ओर शासन गौ-संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर गौ-आश्रय समाप्त करने की कार्रवाई विरोधाभासी है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि सामाजिक, आर्थिक और मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गौ-पालन स्थल को यथावत रखा जाए। यह ज्ञापन अखिल भारतीय चंद्रवंशी खाती पटेल समाज महासभा एवं युवा संगठन की ओर से सौंपा गया।