भोपाल। लिंक रोड नंबर-2 स्थित नगर निगम दफ्तर का गुरुवार को कांग्रेसियों ने घेराव किया। वहीं, मुख्य गेट पर निगम का पुतला फूंका। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि भोपाल 25 साल से बिना मास्टर प्लान के है। सरकार तुरंत मास्टर प्लान लागू करें और व्यापारियों को राहत दें। पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने सवाल उठाया कि जब अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर, बावड़ियाकलां समेत पूरे शहर में आवासीय भवनों में व्यवसायिक एक्टिविटी नहीं हो सकती तो फिर नगर निगम सालों से कमर्शियल टैक्स क्यों वसूल रहा है?
दोपहर 1रू30 बजे निगम मुख्यालय का घेराव करने पहुंचे कांग्रेसियों ने जमकर नारेबाजी की। करीब पौन घंटे तक प्रदर्शन किया गया। पूर्व मंत्री शर्मा ने कहा कि भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल, बुधवार को सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट में राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक भी लगा दी। इस मामले में नगर निगम बेहतर तरीके से अपना पक्ष नहीं रख सका।
अब निगम प्रतिष्ठानों की तालाबंदी करेगी, जबकि निगम की गलती की वजह से ऐसा हुआ है। दूसरी ओर, 25 साल से सरकार भोपाल का मास्टर प्लान नहीं ला सकी है। कांग्रेस की 15 महीने की सरकार के दौरान मास्टर प्लान अंतिम दौर में पहुंच गया था। यदि एक महीने सरकार और रहती तो मास्टर प्लान लागू हो जाता। सरकार और निगम की गलती का खामियाजा व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। इसलिए सरकार जल्दी मास्टर प्लान लागू करें। वहीं, तत्काल राहत देने के लिए मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू की जाए।
निगम को कमर्शियल टैक्स नहीं वसूलना चाहिए
कांग्रेस पार्षद गुड्डू चौहान ने कहा कि निगम सालों से दुकानदारों से कमर्शियल टैक्स वसूल रहा है। जब नियम ही नहीं है तो निगम ऐसा कैसे कर सकता है? इसलिए निगम तुरंत व्यापारियों को कमर्शियल टैक्स की राशि वापस करें। कांग्रेस नेता शोएब खान ने कहा कि निगम यदि सही ढंग से पक्ष रखता तो बड़ी राहत मिल सकती थी। इसके चलते ही आज पुतला दहन किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह दिया है आदेश
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाने के बारे में दलीलें दी गईं। साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन की ओर से पेश अधिवक्ता को भी कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों के समानांतर किसी अन्य प्रक्रिया या जांच समिति के माध्यम से कार्रवाई प्रभावित नहीं की जा सकती।
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि निगम अवैध निर्माण और व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन विभिन्न स्तरों पर बाधाओं के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब कार्रवाई होगी तेज
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद माना जा रहा है कि राजधानी में आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई फिर तेज होगी। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि अवैध निर्माण और भूमि उपयोग के उल्लंघन के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रखी जाए। इसके बाद गुरुवार को नगर निगम ने कार्रवाई को लेकर प्लान तैयार किया।