नीमच। राजस्व व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पटवारी अब अपनी ही मांगों को लेकर सड़कों पर हैं। वर्षों से लंबित पदोन्नति और कैडर रिव्यू की मांग को लेकर नीमच सहित प्रदेशभर के पटवारियों ने कलमबंद हड़ताल का रास्ता अपनाया है। तहसील कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं पटवारी संगठन का कहना है कि यह आंदोलन मजबूरी में उठाया गया कदम है। उनका साफ कहना है कि जब तक सरकार मांगों पर लिखित निर्णय नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
20-25 वर्षों से लंबित है पदोन्नति की मांग-
पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में कैडर रिव्यू और वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को लागू करना शामिल है। उन्होंने कहा कि 20 से 25 वर्षों से पदोन्नति की मांग लंबित है, जबकि अन्य विभागों में कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया जा चुका है।
मुख्यमंत्री के नाम विधायक को सौंपा ज्ञापन-
पटवारियों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार के आवास पर ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री से मांगों के शीघ्र निराकरण की अपील की है। उनका कहना है कि शासन स्तर पर वार्ता जारी है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन-
संघ के अनुसार शासन ने उनकी दो मांगों पर पहल की है, जिसमें नायब तहसीलदार भर्ती के लिए रोस्टर जारी करना तथा पटवारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने का निर्णय शामिल है। हालांकि, पदोन्नति और कैडर रिव्यू की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।
पटवारियों की हड़ताल से शासकीय कार्य प्रभावित-
पटवारियों ने कहा कि हड़ताल के कारण राजस्व से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आय, जाति प्रमाण पत्र, जमीन संबंधी प्रकरण, बंटवारा, ऑनलाइन केवाईसी, फार्मर रजिस्ट्री सहित कई कार्यों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी नहीं चाहते कि किसान और आमजन परेशान हों, लेकिन लंबित मांगों के समाधान के लिए आंदोलन करना आवश्यक हो गया है।
मुख्यमंत्री से सहानुभूतिपूर्वक विचार कर निर्णय लेने की मांग-
पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पटवारी राजस्व विभाग की जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा तो प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से सहानुभूतिपूर्वक विचार कर जल्द निर्णय लेने की मांग की। पटवारियों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से मांगों को पूरा करने संबंधी लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक उनका धरना और कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी।