नीमच। भारत की संस्कृति, शिक्षा और ग्रामीण जीवन को करीब से जानने की जिज्ञासा फ्रांस के एक दंपति को हजारों किलोमीटर दूर नीमच तक खींच लाई। पेरिस के निकट रहने वाले सिरिल और क्लारा 19 दिवसीय भारत यात्रा के तहत गुरुवार को दो दिवसीय प्रवास पर नीमच पहुंचे। यहां उनका स्वागत सांस्कृतिक अतिथियों के रूप में किया गया।
नीमच पहुंचने के बाद दोनों विदेशी मेहमान खड़ावदा के शासकीय प्राथमिक विद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विद्यार्थियों को फ्रेंच भाषा के सरल शब्द, दैनिक अभिवादन और एक से दस तक की गिनती सिखाई। बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक उनसे संवाद किया। इस अनूठे सांस्कृतिक और भाषाई आदान-प्रदान ने विद्यालय का वातावरण उत्साहपूर्ण बना दिया।
अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान सिरिल और क्लारा जिले की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों का भ्रमण करेंगे। वे खोर स्थित 11वीं शताब्दी के नव तोरण मंदिर, अठाना का शीश महल, जमुनिया रावजी का किला, पिपलिया रावजी की ऐतिहासिक बावड़ी तथा भादवा माता मंदिर के दर्शन करेंगे। फ्रांस के लुर्द स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल से जुड़ी अपनी आस्था के कारण वे भादवा माता धाम को लेकर विशेष रूप से उत्साहित हैं।
फ्रांस में बीयर निर्माण का व्यवसाय करने वाले सिरिल और क्लारा ग्रामीण परिवारों के साथ समय बिताकर भारतीय संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों को भी सीखेंगे। उनका मानना है कि किसी देश को सही मायनों में समझने के लिए उसकी संस्कृति, भोजन, शिक्षा और ग्रामीण जीवन को जानना आवश्यक है।
इस दौरान नीमच के टूरिस्ट गाइड हिम्मत सिंह ने उन्हें जिले की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से परिचित कराया। विदेशी मेहमानों का यह दौरा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं, बल्कि भारत और फ्रांस की संस्कृति, भाषा और परंपराओं के बीच संवाद का एक यादगार अवसर बन गया है।