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January 29, 2026, 2:57 pm
BIG NEWS : केंद्र की योजनाओं में मिली राशि के उपयोग पर सख्ती, अब ई-यूसी देना होगा अनिवार्य, प्रदेश दूसरे काम में नहीं कर सकेगा राशि का उपयोग, पढे़ खबर 

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भोपाल। प्रदेश में केंद्र सरकार की सहायता से संचालित योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर अब सख्ती बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि केंद्र से प्राप्त धनराशि के खर्च का इलेक्ट्रॉनिक उपयोगिता प्रमाण पत्र (ई-यूसी) देना अब अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था इसी साल 1 जनवरी 2026 से लागू कर दी गई है।


केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश के वित्त विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागीय सचिवों को पत्र जारी कर ई-यूसी व्यवस्था का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत संबंधित विभागों के अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक उपयोगिता प्रमाण पत्र के साथ-साथ पहले से दी जा रही भौतिक (फिजिकल) उपयोगिता प्रमाण पत्र की व्यवस्था भी अगले आदेश तक जारी रखनी होगी।


पीएफएमएस पर विकसित की गई ई-यूसी सुविधा
केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर और पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) की ओर से फरवरी और दिसंबर 2025 में राज्य सरकारों को इस संबंध में पत्र भेजे गए हैं। पत्र में बताया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत राज्यों को मिलने वाली अनुदान राशि के लिए ई-यूसी जमा करने की सुविधा अब पीएफएमएस पोर्टल पर विकसित कर दी गई है।


केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे अपने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें कि सभी सीएसएस योजनाओं के लिए ई-यूसी केवल पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से ही जमा किए जाएं।


मुख्य सचिव की जिम्मेदारी
एक्सपेंडिचर डिपार्टमेंट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2026 से ई-यूसी पोर्टल के माध्यम से उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना सभी राज्यों के लिए अनिवार्य होगा। इसके पालन की जिम्मेदारी राज्य के मुख्य सचिवों पर होगी। निर्देश दिए गए हैं कि यूसी किसी अन्य माध्यम से स्वीकार नहीं किए जाएंगे।


गलत उपयोग रोकने के लिए सख्ती
केंद्र सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए लागू की है क्योंकि कई मामलों में राज्यों को केंद्र से मिली राशि का उपयोग तय उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में कर लिया जाता है। कई बार यह काम राज्य सरकार की सहमति से तो कई बार बिना अनुमति के अधिकारियों द्वारा किया जाता है।


विशेष रूप से नगरीय विकास एवं आवास विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े फंड में 60 से 70 प्रतिशत मामलों में इस तरह की अनियमितता सामने आई है। ऐसे में केंद्र सरकार का मानना है कि ई-यूसी व्यवस्था लागू होने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जिस कार्य के लिए धनराशि दी गई है, उसका उपयोग उसी कार्य में हो और अनुदान राशि का दुरुपयोग रोका जा सके।

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