मंदसौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 31 जनवरी तक सीतामऊ में आयोजित तीन दिवसीय द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सीतामऊ साहित्य महोत्सव सांस्कृतिक पुनरुत्थान का पर्व है, जिसमें सभी का हार्दिक स्वागत है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हजारों वर्षों से राष्ट्र एवं सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर का उन्नत शिखर एवं आकाश में लहराता ध्वज हमें गौरव की अनुभूति कराता है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार सीतामऊ स्थित नटनागर शोध संस्थान राष्ट्र एवं विश्व की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जो एक तीर्थस्थल के समान है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नटनागर शोध संस्थान की स्थापना वर्ष 1974 में सीतामऊ के महाराज कुमार रघुवीर सिंह द्वारा की गई थी। आज यह संस्थान शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 30 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रह के कारण यह संस्थान एशिया की प्रमुख लाइब्रेरी के रूप में विख्यात है। यहां भारत सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोधार्थी विभिन्न विषयों पर पीएचडी एवं शोध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संस्थान से हिंदी साहित्य एवं इतिहास जगत की महान विभूतियां जैसे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत एवं आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जैसे नाम जुड़े रहे हैं।
नटनागर शोध संस्थान में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एवं 1857 की क्रांति से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी संरक्षित हैं। यह संस्थान भारतीय इतिहास, साहित्य एवं संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र है।
उल्लेखनीय है कि द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का आयोजन सीतामऊ स्थित नटनागर शोध संस्थान परिसर में किया जा रहा है। देशभर से साहित्यकार, विद्वान, वक्ता, कलाकार एवं इतिहासकार इसमें सहभागिता कर रहे हैं। इस महोत्सव को “नॉलेज कुंभ” के रूप में विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता करते हुए इस आयोजन की सराहना की तथा समस्त प्रशासन एवं आयोजकों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
महोत्सव के प्रथम दिवस की प्रमुख प्रस्तुतियां-
महोत्सव के प्रथम दिवस डॉ. प्रद्युम्न भट्ट ने मंदसौर जिले में कला के विकास एवं प्रतिनिधि कलात्मक प्रतिमाओं के सांस्कृतिक महत्व पर व्याख्यान दिया। वैदिक कल्लाजी यूनिवर्सिटी के संस्थापक वीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मनुष्य, धर्म एवं विज्ञान विषय पर विचार प्रस्तुत किए। अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मीर रंजन नेगी (जिन पर आधारित फिल्म चक दे इंडिया) ने ओलंपिक, एशियन गेम्स एवं अपने खेल जीवन से जुड़े संस्मरण साझा किए। वात्सल्य स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा हिंगलाजगढ़ किले पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी गई।
भारतीय सिनेमा के प्रख्यात अभिनेता रघुवीर यादव ने थिएटर से वेब सीरीज तक की अपनी यात्रा एवं बचपन के अनुभव साझा किए। प्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं कवि विवेक चतुर्वेदी ने कविता पाठ किया, जिसमें उनकी चर्चित रचना “स्त्रियां घर लौटती हैं” का वाचन शामिल रहा। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक राजेश कुमार ने स्वतंत्रता संग्राम में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आंदोलनों की भूमिका पर व्याख्यान दिया। सत्र का संचालन रवीना मीणा, पूर्व शोधार्थी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा किया गया।