मंदसौर। वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक डॉ. संपत स्वरूप जाजू ने कहा कि यह देश का 80वां केंद्रीय बजट और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार 9वां बजट है, लेकिन यह बजट मंदसौर संसदीय क्षेत्र की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया।
डॉ. जाजू ने कहा कि बजट मूल रूप से हर वर्ष का लेखा-जोखा होता है, लेकिन इस बार भी पिछले कई बजटों की तरह सरकार ने वर्ष 2047 के विकसित भारत के विजन को केंद्र में रखकर बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले बजटों में घोषित कई अधोसंरचनात्मक योजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं, चाहे वे रेल, हवाई सेवाएं या पर्यटन से जुड़ी योजनाएं हों।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के रतलाम-मंदसौर-नीमच-जावरा, चित्तौड़गढ़-उदयपुर-भीलवाड़ा-अजमेर जैसे संसदीय क्षेत्रों का दुर्भाग्य है कि बजट 2026-27 की दो प्रमुख घोषणाओंकृहाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और फ्रेट कॉरिडोर-में इन क्षेत्रों को कोई लाभ नहीं मिला।
डॉ. जाजू ने कहा कि क्षेत्र की जनता की अपेक्षा थी कि उदयपुर-मुंबई, अजमेर-भोपाल और चित्तौड़गढ़-उदयपुर होते हुए मुंबई को हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इसी प्रकार चित्तौड़गढ़ और नीमच क्षेत्र सीमेंट उद्योग का बड़ा हब है और यहां हिंदुस्तान जिंक का एशिया का सबसे बड़ा प्लांट स्थित है, ऐसे में यहां फ्रेट कॉरिडोर की अत्यंत आवश्यकता थी, लेकिन बजट में इसे नजरअंदाज किया गया।
पर्यटन क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि बजट में बौद्ध सर्किट की बात तो की गई, लेकिन आगामी वर्षों में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए ओंकारेश्वरदृउज्जैनदृमंदसौर होते हुए नाथद्वारा तक शिव कॉरिडोर की घोषणा की जानी चाहिए थी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि नीमच और मंदसौर को हवाई सेवाओं से जोड़ने के लिए हवाई पट्टी के उन्नयन अथवा छोटे हवाई अड्डे की घोषणा होगी, लेकिन बजट ने इस दिशा में भी निराश किया।
डॉ. संपत स्वरूप जाजू ने कहा कि कुल मिलाकर इस बजट में मंदसौर संसदीय क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आवश्यक अधोसंरचनात्मक योजनाओं की उपेक्षा की गई है, जिससे क्षेत्र की जनता में निराशा है।