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February 2, 2026, 3:19 pm
KHABAR : नर्मदा बचाओ आंदोलन को लेकर मछुआरों की नाव रैली, बड़वानी में 30 नावों पर निकले सैकड़ों लोग, अधिकारों के लिए सरकार से 10 मांगें, पढे़ खबर 

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बड़वानी। नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत विस्थापित मछुआरों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर सोमवार को प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने किया।


मछुआरों ने कसरावद से राजघाट तक नर्मदा नदी में एक विशाल नाव रैली निकाली। इसमें 30 से अधिक नावों में सैकड़ों लोग सवार थे। रैली के जरिए उन्होंने सरकार का ध्यान अपनी लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया। रैली के बाद मछुआरा संगठनों की ओर से कलेक्टर बड़वानी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।


10 सूत्रिय मांग को ज्ञापन दिया जाएगा
ज्ञापन में 10 प्रमुख मांगें शामिल हैं। इनमें सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार अधिकार देना, प्रस्तावित नर्मदा माता मत्स्य सहकारी उत्पादन एवं विपणन संघ का पंजीकरण करना, पुनर्वास लाभ, आवास, आजीविका, और मत्स्य व्यवसाय सहकारी समितियों को सौंपना और ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करना शामिल है।


जलाशय प्रदूषण, अवैध खनन पर मछुआरों की मांगें उठीं
आंदोलनकारियों ने जलाशय में प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन और जलस्तर गिरने से मत्स्याखेट पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मछुआरों को किसान का दर्जा देने, केसीसी कार्ड उपलब्ध कराने, मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता बढ़ाने और पुलिस-प्रशासन की ओर से उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग भी की।


मछुआरों के अधिकार नहीं मिले, आंदोलन तेज होगा
मेधा पाटकर ने कहा कि नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं, लेकिन उन्हें वर्षों बाद भी उनके कानूनी अधिकार नहीं मिले हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


इस नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों के बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार शामिल हुए।


सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य अधिकार राज्य शासन
आंदोलनकारियों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले का हवाला दिया, जो सरदार सरोवर अंतरराज्यीय परियोजना से संबंधित लाभ, हानि और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर 10 साल बाद पारित हुआ था।


यह फैसला 18 अक्टूबर 2000 के सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार कानून माना जाता है, और इसके पालन की जिम्मेदारी शासकों की है। ट्रिब्यूनल के फैसले की धारा ग्प्, उपधारा ट(8) के अनुसार, सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य पालन का अधिकार राज्य शासन का है।


केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मत्स्य विभाग के एक अधिकारी ने कुछ साल पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों को इस संबंध में पत्र भी लिखा था।

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