खरगोन। रमजान से पूर्व आने वाली 15वीं शाबान, जिसे शबे-बरात कहा जाता है, इस वर्ष भी कसरावद में पूरी अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों ने नमाज़, इबादत, कुरान शरीफ की तिलावत और रात भर जागकर अल्लाह की बारगाह में दुआएं कीं।
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार शबे-बरात वह मुकद्दस रात है, जिसमें आने वाले साल के फैसले लिखे जाते हैं। माना जाता है कि इस रात यह तय होता है कि कौन जीवित रहेगा, कौन दुनिया से रुख़सत होगा, किसे कितना रिज़्क़ मिलेगा और किसका नसीब खुलेगा या बंद होगा।
शबे-बरात की रात 12 बजे के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने मरहूम परिजनों की मग़फिरत के लिए कब्रिस्तानों में पहुंचे और दुआएं कीं। जामा मस्जिद में शहर काजी इरफान कादरी ने बयान किए। देश में अमन-चौन और खुशहाली की दुआ मांगी।