नीमच। जिले की जावद तहसील के ग्राम मोरवन में प्रस्तावित टेक्सटाइल उद्योग को लेकर चला आ रहा कानूनी विवाद में एमपीआईडीसी को बड़ी सफलता मिली है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 5 फरवरी, गुरुवार को इस मामले में लगाए गए अंतरिम स्टे को समाप्त कर दिया। करीब तीन महीने तक चली न्यायिक रोक हटने के बाद अब मोरवन सहित पूरे नीमच जिले में औद्योगिक विकास का रास्ता साफ हो गया है। स्टे के कारण पिछले लगभग तीन महीनों से फैक्टरी निर्माण का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सकेगा। इससे क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मोरवन में सुविधि रेयॉन्स टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड को जमीन आवंटित की गई थी। फैक्टरी के लिए वहां बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू हो चुका था। मामले में 10 नवंबर 2025 को हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। इसमें जमीन आवंटन पर आपत्ति जताई गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि संबंधित भूमि चरनोई (चारागाह) की है और बिना विधिक प्रावधानों के उसका डायवर्सन किया गया है। याचिकाकर्ता ने जमीन आवंटन को निरस्त करने की मांग की थी। याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि चरनोई भूमि के डायवर्सन का अधिकार कलेक्टर को नहीं है, चारागाह की जमीन कम हो जाएगी और इंडस्ट्री आने से गांव पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। मामले की पहली सुनवाई के दौरान 17 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। इसके तहत फैक्टरी निर्माण सहित सभी गतिविधियों पर अंतरिम रोक लग गई थी।
इसके बाद मामले में मध्यप्रदेश शासन और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) की ओर से विस्तृत जवाब पेश किया गया। शासन की तरफ से एडवोकेट जनरल और एमपीआईडीसी की ओर से अधिवक्ता अविरल विकास खरे ने पैरवी की। जवाब में कहा गया कि संबंधित भूमि का डायवर्सन पूरी तरह विधिक प्रावधानों के तहत किया गया है और कलेक्टर को इसके लिए कानूनन अधिकार प्राप्त हैं। शासन ने कोर्ट को बताया कि मोरवन क्षेत्र में चारागाह के लिए निर्धारित भूमि कानून में आवश्यक मात्रा से कहीं अधिक उपलब्ध है और उसी अतिरिक्त भूमि के एक छोटे हिस्से को औद्योगिक प्रयोजन के लिए परिवर्तित किया गया है। इसके अलावा जिस भूमि का डायवर्सन किया गया है, वह बंजर और खाली जमीन है, जहां पशुओं का आवागमन नहीं होता। इस भूमि के परिवर्तित किए जाने से न तो चारागाह व्यवस्था प्रभावित हुई है और न ही गांव की पशुधन व्यवस्था पर कोई असर पड़ा है।
पर्यावरण पर कोई असर नहीं, उलटे रोजगार बढ़ेगा
शासन और एमपीआईडीसी की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि परियोजना से किसी तरह का पर्यावरणीय नुकसान नहीं होगा। फैक्टरी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के बाद ही शुरू किया जाएगा। कंपनी से यह अंडरटेकिंग भी ली गई है कि यूनिट ‘जीरो डिस्चार्ज’ के सिद्धांत पर काम करेगी, जिससे पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बल्कि टेक्सटाइल उद्योग के स्थापित होने से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक सुधार आएगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य में औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा देगी। जवाब में यह भी तर्क रखा गया कि जमीन आवंटन 2017 में हुआ था और याचिका आठ साल बाद दायर की गई है और इसके पीछे राजनीतिक खेल है, इसके चलते याचिका में कई तथ्य भ्रामक और असत्य प्रस्तुत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य केवल विकास कार्यों को रोकना था।
कोर्ट ने मानाकृप्राथमिक रूप से कोई प्रतिकूल असर नहीं
स्टे हटाने के आवेदन पर सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि भूमि का डायवर्सन प्रावधानों के अनुसार किया गया है, कलेक्टर के पास इसके लिए अधिकार हैं और शासन की योजना के अनुरूप कार्य हुआ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राथमिक रूप से परियोजना से किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नजर नहीं आता है, जबकि स्टे के कारण औद्योगिक विकास बाधित हो रहा है। इसी आधार पर कोर्ट ने अंतरिम स्टे को आगे जारी रखने से इनकार कर दिया।
अब निर्माण कार्य को मिलेगी गति
नीमच के मोरवन में करीब 350 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाली यह सुविधि रेयांस फैक्टरी यहां 31 हैक्टेयर जमीन पर स्थापित हो रही है। इसे मध्य प्रदेश की औद्योगिक निवेश नीति के तहत जमीन दी गई है। इससे लगभग 1500 लोगों को सीधा रोजगार देगी। इनमें ज़्यादातर स्थानीय युवक और महिलाएं होंगी, जिससे लोगों को अपने ही गांव-घर के पास काम मिलेगा। यह फैक्टरी कपड़े की बुनाई, प्रोसेसिंग और वस्त्र सिलाई (गारमेंट्स) का काम करेगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब टेक्सटाइल फैक्टरी का निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सकेगा। इससे नीमच जिले में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह फैसला उद्योग, निवेश और रोजगार के पक्ष में अहम माना जा रहा है और इससे मोरवन तथा नीमच जिले के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।