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February 28, 2026, 11:05 am
BIG NEWS : सैंपल लिए जा रहे, लेकिन रिपोर्ट गायब! खाद्य सुरक्षा विभाग पर उठे सवाल, व्यापारियों ने लगाए उगाही के दबाव के आरोप, कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी नाराजगी, पढ़े शब्बीर बोहरा की खबर 

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नीमच। जिले में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्रशासन विभाग की है, लेकिन विभाग की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि विभाग द्वारा लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों में असंतोष बढ़ रहा है।

व्यापारी एवं उद्यमियों का कहना है कि विभाग सैंपल तो लेता है, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट उजागर नहीं करता। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि रिपोर्ट का हवाला देकर कुछ लोगों पर उगाही का दबाव बनाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने विभाग की पारदर्शिता पर संदेह खड़ा कर दिया है।

हजारों रिपोर्ट फाइलों में कैद-जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा समय-समय पर हजारों खाद्य सैंपल लिए गए हैं, जिनकी जांच प्रयोगशाला से होकर वापस आ चुकी है। बावजूद इसके, कितने सैंपल पास हुए और कितने फेल, किस प्रतिष्ठान के खाद्य पदार्थ में क्या खामियां पाई गईं इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
यह पूरा रिकॉर्ड विभागीय फाइलों तक ही सीमित बताया जा रहा है।

शासन स्तर से कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के प्रति जनता को जागरूक किया जाए तथा दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, लेकिन जिले में इसका प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा।

व्यापारियों के आरोप-
शहर के व्यापारियों और उद्यमियों का आरोप है कि यदि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तो उपभोक्ता जागरूक होंगे और मिलावट करने वाले प्रतिष्ठानों से खरीदारी बंद कर देंगे। उनका कहना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से मिलावटखोरों पर कार्रवाई नहीं हो पाती, जबकि नियमों का पालन करने वाले व्यापारी अनावश्यक दबाव झेलते हैं।

रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई लंबित-
विभाग का दावा है कि भोपाल प्रयोगशाला से सैंपल जांच रिपोर्ट 8 से 14 दिनों के भीतर प्राप्त हो जाती है, लेकिन पिछले कई महीनों में विभाग ने सार्वजनिक रूप से यह जानकारी नहीं दी कि कौन-से सैंपल पास हुए और कौन-से फेल। बताया जा रहा है कि जिन मामलों में सैंपल फेल पाए गए, उनके न्यायालयीन निर्णय आने में भी दो से तीन वर्ष तक का समय लग रहा है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच दर्ज कई प्रकरण अब तक लंबित हैं।

क्या कहते हैं नियम-
नियमों के अनुसार किसी खाद्य पदार्थ का नमूना फेल होने पर संबंधित विक्रेता या निर्माता को खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 46(4) के तहत नोटिस जारी किया जाता है। इसमें केंद्रीय प्रयोगशाला में रिपोर्ट को चुनौती देने का अवसर दिया जाता है। अपील करने पर नमूना पुनः जांच के लिए भेजा जाता है, जिसकी निर्धारित फीस संबंधित पक्ष को जमा करनी होती है। अपील नहीं करने की स्थिति में आगे विधिक कार्रवाई की जाती है।

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