नीमच। जिले के एक दलित परिवार ने कथित जातीय अत्याचार, मारपीट, पुलिस की निष्क्रियता और सुरक्षा की अनुपस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से न्याय की मार्मिक गुहार लगाई है। परिवार के सदस्य जिला अस्पताल में भर्ती हैं और उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी पीड़ा, भय और व्यवस्थाओं पर भरोसे की कमी को प्रदर्शित किया।

नीमच सिटी थाना क्षेत्र के ग्राम डासिया निवासी परिवार 15 मार्च से जिला अस्पताल में उपचाररत है। अस्पताल में पीड़ितों ने तख्तियां उठाकर विरोध दर्ज कराया, जिन पर संदेश लिखे थे- “दलितों पर अत्याचार बंद करो”, “पुलिस संरक्षण में गुंडागर्दी बंद करो”, “हमें न्याय दो या सामूहिक आत्महत्या की अनुमति दो”, “हमें गांव छोड़ने पर मजबूर क्यों किया जा रहा है, मुख्यमंत्री मोहन यादव जी।” इन नारों ने पूरे मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को उजागर किया।

पीड़ित प्रेमचंद मोगिया, मोहन बाई मोगिया और नीतू मोगिया ने अजाक थाना नीमच के थाना प्रभारी पर लापरवाही और पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार के अनुसार, 26 फरवरी को चने की फसल को लेकर मोहनसिंह और उनके पिता बाबूसिंह से विवाद हुआ था।

परिवार का आरोप है कि घटना के बाद शिकायत करने के बावजूद थाना अजाक में समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके अलावा, पीड़ित पक्ष पर रिपोर्ट वापस लेने का दबाव भी डाला गया। इसी रंजिश के चलते 15 मार्च को आरोपी फिर से परिवार के घर और खेत पर पहुंचे और नीतू, उनके पिता प्रेमचंद और माता के साथ लाठी-डंडों से बेरहमी से मारपीट की। साथ ही जाति सूचक गालियों से अपमानित किया गया। सभी घायलों का उपचार फिलहाल जिला अस्पताल में चल रहा है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जातिवादी गुंडों को पुलिस संरक्षण प्राप्त है, जिससे उन्हें अब अपने ही गांव, घर और खेत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

परिवार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अजाक थाना प्रभारी की भूमिका की जांच की जाए, आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
