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May 4, 2026, 12:01 pm
KHABAR : जनगणना 2027 में मातृभाषा को लेकर सवाल, उर्दू सहित अन्य भाषाओं के दर्ज होने पर उठी चिंता, डिजिटल जनगणना के बावजूद जमीनी स्तर पर अनियमितताओं के आरोप, पढ़े खबर 

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नीमच। जनगणना 2027 को लेकर जहां केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल प्रणाली के माध्यम से सटीक आंकड़े जुटाने का दावा किया जा रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर सामने आ रही स्थितियाँ इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर प्रगणक नागरिकों की वास्तविक मातृभाषा दर्ज करने के बजाय केवल हिंदी या अंग्रेजी का ही उल्लेख कर रहे हैं।

मातृभाषा चयन के बावजूद एकरूपता का आरोप-
जनगणना 2027 इस बार पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जा रही है, जिसमें नागरिकों को स्वयं भी अपना विवरण भरने का विकल्प दिया गया है। इस प्रक्रिया में मातृभाषा का चयन एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे देश की भाषाई विविधता का सही आंकलन हो सके। इसके बावजूद नीमच सहित कई क्षेत्रों से शिकायतें सामने आ रही हैं कि प्रगणक नागरिकों से उनकी वास्तविक मातृभाषा पूछे बिना ही हिंदी या अंग्रेजी दर्ज कर रहे हैं।

उर्दू सहित अन्य भाषाओं के आंकड़ों पर असर की आशंका-
गौरतलब है कि उर्दू भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल एक मान्यता प्राप्त भाषा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि भाषा का किसी धर्म से कोई संबंध नहीं होता और उर्दू भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। ऐसे में गलत प्रविष्टियों के कारण उर्दू सहित अन्य भाषाओं के वास्तविक आंकड़े प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय स्तर पर चिंता, अधिकारों पर असर की आशंका-
स्थानीय स्तर पर इस स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि यदि जनगणना में मातृभाषा सही ढंग से दर्ज नहीं की गई, तो भविष्य में उर्दू माध्यम के स्कूलों, शिक्षकों एवं अन्य भाषाई सुविधाओं से संबंधित योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।

पूर्व पार्षद ने की सजग रहने की अपील-
पूर्व पार्षद हारून रशीद कुरैशी ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी मातृभाषा को लेकर सजग रहें और यदि प्रगणक गलत जानकारी दर्ज कर रहे हों तो तुरंत उसे सही कराने के लिए आग्रह करें। उन्होंने कहा कि यह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाषाई पहचान और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

जनगणना 2027 का उद्देश्य देश की वास्तविक सामाजिक एवं भाषाई तस्वीर प्रस्तुत करना है। ऐसे में जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार की त्रुटि इसके परिणामों को प्रभावित कर सकती है। आवश्यक है कि प्रगणक अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन करें तथा नागरिक भी जागरूक रहकर अपनी सही मातृभाषा का उल्लेख सुनिश्चित करें।
 

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