नीमच। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देशन में कृषि उपज मंडी समिति, नीमच द्वारा कृषकों की उपज की समय पर नीलामी, शीघ्र तौल एवं भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए वर्ष 2025-26 में बहुआयामी एवं उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।
राजस्व एवं आवक में अभूतपूर्व वृद्धि-
वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में आवक 64,16,201 क्विंटल से बढ़कर 72,40,492 क्विंटल हो गई, जो 13 प्रतिशत की वृद्धि है। मंडी शुल्क 33.02 करोड़ से बढ़कर 34.58 करोड़ हुआ, जिसमें 1.56 करोड़ (5 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज की गई। ई-अनुज्ञा पोर्टल पर विलंब शुल्क एवं ब्याज के रूप में 1.73 लाख की अतिरिक्त वसूली की गई।
पारदर्शी नीलामी से रिकॉर्ड राजस्व-
नवीन मंडी प्रांगण डुंगलावदा में 248 भूखंडों की पारदर्शी नीलामी से अपसेट वैल्यू 5.02 करोड़ के विरुद्ध 55.81 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। उड़नदस्ता कार्रवाई के तहत 36 प्रकरणों में 3.68 लाख की वसूली की गई।
अधोसंरचना एवं तकनीकी उन्नयन-
- नवीन मंडी प्रांगण को हाई-टेक मंडी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- किसानों हेतु आर.ओ. संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
- मुख्य मंडी, नवीन मंडी एवं उपमंडी जीरन को सीसीटीवी सर्विलांस युक्त किया गया तथा फायर फाइटर लगाए गए।
- दो बड़े इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों से सीधे गोदाम डिलीवरी व्यवस्था प्रारंभ की गई।
- बिजनेस एग्रो मॉल का प्रस्ताव स्वीकृति हेतु वरिष्ठालय भेजा गया है।
- नवीन मंडी डुंगलावदा-चंगेरा एवं उपमंडी जीरन हेतु शासकीय भूमि आवंटन की कार्यवाही प्रचलित है।
- ई-मंडी एवं औषधीय उपजों का सशक्तीकरण
गेहूं, जौ, मक्का, सोयाबीन, लहसुन, धनिया, रायड़ा सहित प्रमुख उपजों का ई-मंडी के माध्यम से विक्रय प्रारंभ किया गया है। अन्य उपजों को भी शीघ्र जोड़ा जाना प्रस्तावित है।
नीमच मंडी औषधीय एवं मसाला फसलों का प्रमुख केंद्र है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के प्रयासों से चिया सीड, किनोवा सहित कुल 26 औषधीय एवं वन उपजों को ई-अनुज्ञा पोर्टल पर अधिसूचित कराया गया, जिससे किसानों एवं व्यापारियों को विक्रय में सुविधा मिली है।
औषधीय मंडी हेतु केंद्र से अनुदान-
मुख्य मंडी प्रांगण के औषधीय मंडी उन्नयन हेतु राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा 5.50 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया गया है।
भारत की अनोखी औषधीय मंडी के रूप में नीमच-
नीमच कृषि उपज मंडी देश की एकमात्र ऐसी मंडी है जहां औषधीय फसलों की सार्वजनिक नीलामी होती है। यहां 65 से अधिक प्रकार की औषधीय फसलें- अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, चिया सीड, किनोवा, नागरमोथा, अकरकरा, बेल फल, गुलाब की सूखी पत्ती, नीम पत्ती, संतरे के छिलके आदि नीलामी के लिए आती हैं। गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित कई राज्यों के किसान यहां अपनी उपज लेकर आते हैं। इसे “भारत की अनोखी औषधीय मंडी” कहा जाता है।
नीमच मंडी की विशेषता-
यह देश की पहली ऐसी मंडी है जहां “कांटे, पत्ती और छिलके तक की नीलामी” होती है। यहां उपज के अनुसार 500 से 2 लाख तक के भाव प्राप्त होते हैं। अप्रैल के बाद आवक दोगुनी हो जाती है।
यदि किसान औषधीय फसलें उगाते हैं, तो शासन के नए प्रावधानों के तहत 15 औषधीय फसलें प्रदेश की सभी मंडियों में भी बिक सकेंगी, लेकिन सर्वाेत्तम मूल्य और व्यापक बाजार नीमच मंडी में ही उपलब्ध होता है। उक्त जानकारी मंडी सचिव नीमच उमेश बसेडिया शर्मा द्वारा दी गई।