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July 29, 2026, 12:41 pm
KHABAR : कृषि विज्ञान केन्द्र की किसानों को सलाह, संतरा और सोयाबीन फसल के संरक्षण के बताए उपाय, फल गिरने से लेकर कीट नियंत्रण तक की जानकारी से कराया अवगत, पढ़े खबर 

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मंदसौर। कृषि विज्ञान केन्द्र, मंदसौर द्वारा किसानों के लिए सामयिक कृषि सलाह जारी करते हुए संतरा एवं सोयाबीन फसल के बेहतर प्रबंधन तथा रोग एवं कीट नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय सुझाए गए हैं।

कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने बताया कि संतरा फसल में फल गिरने की समस्या की रोकथाम के लिए 1.5 ग्राम जिबरेलिक एसिड, 100 ग्राम कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी तथा 1 किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। यदि फल गिरना जारी रहे तो 15 दिन बाद पुनः छिड़काव किया जाए। साथ ही पेड़ों के तने पर बोर्डाे पेस्ट का लेपन तथा पौधों पर 1 प्रतिशत बोर्डाे मिश्रण का 15-15 दिन के अंतराल से छिड़काव करने से फलों के पीले होकर गिरने की समस्या में कमी आती है।

उन्होंने बताया कि संतरा के फलों का आकार बढ़ाने के लिए 1.5 किलोग्राम 0:52:34 अथवा 13:0:45 उर्वरक के साथ 1.5 ग्राम जिबरेलिक एसिड को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना लाभकारी रहेगा।

सोयाबीन फसल में तना एवं जड़ सड़न रोग की रोकथाम के लिए टैबूकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ईसी की 1 मिलीलीटर मात्रा अथवा टैबूकोनाजोल 10 प्रतिशत एवं सल्फर 65 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

इसके अतिरिक्त किसानों को सोयाबीन में चक्र भृंग एवं तना मक्खी के प्रकोप की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। प्रकोप पाए जाने पर थियाक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत एससी की 750 ग्राम मात्रा अथवा थायमेथोक्साम 12.5 प्रतिशत एवं लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेडसी की 125 मिलीलीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।

कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों से मौसम एवं फसल की स्थिति को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की अपील की है।

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