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June 15, 2026, 4:26 pm
BIG NEWS : अफीम नीति 2026-27 पर मंथन, किसानों की मांगों से गूंजी सलाहकार समिति की बैठक, पट्टों की बहाली, मूल्य वृद्धि, फसल बीमा, 8/29 धारा में संशोधन और आधुनिक तकनीक पर जोर, जनप्रतिनिधियों, किसानों और अधिकारियों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव, वित्त मंत्रालय को भेजी जाएगी अनुशंसा, पढ़े खबर 

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नीमच। देश की जीवनरक्षक औषधियों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने वाली अफीम फसल की आगामी नीति 2026-27 को लेकर सोमवार को नीमच स्थित मंगलम रिसोर्ट में अफीम सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में नीमच-मंदसौर क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, सांसदों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया तथा अफीम किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में किसानों ने अफीम उत्पादन, लाइसेंस व्यवस्था, मॉर्फीन मानक, मूल्य निर्धारण, फसल बीमा, सीपीएस पद्धति तथा एनडीपीएस एक्ट से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव रखे। 

सितंबर में जारी हो नीति, समय पर मिले लाइसेंस- 
किसानों ने मांग रखी कि अफीम नीति प्रत्येक वर्ष सितंबर माह के प्रथम सप्ताह में जारी की जाए ताकि बुवाई के अनुकूल समय में किसानों को लाइसेंस मिल सके। किसानों का कहना था कि अफीम की बुवाई का उपयुक्त समय अक्टूबर का प्रथम पखवाड़ा होता है और नीति में देरी से खेती प्रभावित होती है।

कटे हुए पट्टों की बहाली और मूल्य वृद्धि की मांग-
बैठक में किसानों ने वर्ष 1990 से कटे हुए लाइसेंसों की बहाली तथा वर्ष 1997-98 से लंबित पट्टों को जारी करने की मांग प्रमुखता से उठाई। किसानों का कहना था कि पात्र किसान लंबे समय से लाइसेंस बहाली का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही किसानों और जनप्रतिनिधियों ने अफीम का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि अफीम के मूल्य में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में किसानों को उनकी मेहनत और लागत के अनुरूप उचित मूल्य मिलना चाहिए।

मार्फिन प्रतिशत को लेकर किसानों की चिंता-
बैठक में मॉर्फिन प्रतिशत का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। किसानों का कहना था कि इस वर्ष बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई क्षेत्रों में फसल प्रभावित हुई है, जिससे मॉर्फिन प्रतिशत कम रहने की संभावना है। ऐसे में पात्र किसानों को राहत देते हुए न्यूनतम मॉर्फिन मानक में व्यावहारिक संशोधन किया जाना चाहिए।

पुरानी व्यवस्था से पट्टों के नवीनीकरण की मांग
युवा किसानों ने मांग की कि सरकार मॉर्फीन प्रतिशत बढ़ाने के लिए उपयोगी तकनीक, खाद एवं कृषि पद्धतियों की वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराए। उनका कहना था कि जब तक इस संबंध में स्पष्ट वैज्ञानिक मार्गदर्शन नहीं मिलता, तब तक पुरानी व्यवस्था के आधार पर पट्टों का नवीनीकरण किया जाए। किसानों ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि इसके कारण कई निर्दाेष किसान अनावश्यक रूप से जांच और कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं। उन्होंने इस प्रावधान में संशोधन या पुनर्विचार की मांग की।
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नपती प्रक्रिया में सुधार और तकनीकी सुविधाओं की मांग- 
अफीम किसान नृसिंह डांगी ने बताया कि अफीम की नपती 45 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाए, ताकि फसल की वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सके। अफीम सुखाने के लिए अतिरिक्त बर्तनों की अनुमति दी जाए और तोल केंद्रों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाए जाएं, जिससे वजन में पारदर्शिता बनी रहे। यदि कोई किसान जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है तो उसे सैंपल की पुनः जांच का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने धारा 8/29 और डोडाचूरा पर पुनर्विचार की मांग की। 

विधायक सकलेचा ने रखे तकनीक, बीमा और उत्पादन वृद्धि के सुझाव-
बैठक में विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने अफीम उत्पादन में आधुनिक तकनीक और एआई के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने नपती और अंतिम निरीक्षण की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने, नए किसानों को अवसर देने तथा अफीम फसल को बीमा योजना में शामिल करने की मांग रखी। साथ ही जैविक खेती को प्रोत्साहन देने का सुझाव भी दिया।

राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने उठाए किसानों के प्रमुख मुद्दे-
राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने किसानों की समस्याओं को समिति के समक्ष रखते हुए कहा कि जांच परिणामों में विसंगति होने पर पुनः परीक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने अफीम का मूल्य बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, नपती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने तथा फसल बीमा लागू करने की मांग की। साथ ही सीपीएस पद्धति के छोटे पट्टों का रकबा बढ़ाने का सुझाव भी दिया।

नामांकन, लाइसेंस और खेती संबंधी सुझावों पर चर्चा-
नीमच-मंदसौर संसदीय क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता ने बताया कि बैठक में किसानों के नामांकन अधिकार, दूसरे गांव में स्थित भूमि पर खेती की अनुमति तथा लाइसेंस संबंधी व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। समिति में प्राप्त सुझावों को संकलित कर केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय को भेजा जाएगा, जिनके आधार पर आगामी अफीम नीति 2026-27 का प्रारूप तैयार होगा।

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