भोपाल। राजधानी भोपाल के प्रशासन अकादमी में समान नागरिक संहिता (UCC) की राज्य स्तरीय समिति की अंतिम दौर की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई दिल्ली में एक अन्य आवश्यक मीटिंग होने के कारण व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकीं।
उनकी अनुपस्थिति में समिति के अन्य सदस्य—शत्रुघ्न सिंह (रिटायर्ड IAS और पूर्व मुख्य सचिव), बुद्ध सिंह, गोपाल शर्मा, अनूप नायर, और शोभा पैठणकर ने समिति के सदस्य सचिव अजय कटेसरिया के साथ मिलकर अलग-अलग चार सत्रों में विभिन्न पक्षों से महत्वपूर्ण सुझाव लिए।
बैठक के पहले सत्र में मध्य प्रदेश के विभिन्न आयोगों, जिनमें महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, बाल संरक्षण अधिकार आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग शामिल हैं, के अध्यक्षों, सदस्यों और सचिवों से विस्तार से सुझाव लिए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों ने भी प्रेजेंटेशन के जरिए अपने-अपने प्रस्ताव समिति के सामने रखे।
छह दलों को मिला था आमंत्रण, केवल भाजपा और सीपीएम पहुंचे
समान नागरिक संहिता की इस राज्य स्तरीय बैठक में देश की 6 राष्ट्रीय पार्टियों- भाजपा, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेताओं को आमंत्रित किया गया था।हालांकि, इस महत्वपूर्ण चर्चा में केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सीपीएम के नेता ही शामिल होने पहुंचे, जबकि कांग्रेस सहित अन्य दल बैठक से नदारद रहे।
कम्युनिस्ट पार्टी ने किया मध्य प्रदेश में UCC का कड़ा विरोध
बैठक के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राज्य प्रतिनिधि सदस्य पीवी रामचंद्रन ने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने के फैसले का पुरजोर विरोध किया।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस समय देश और प्रदेश में बेरोजगारी, भुखमरी और महंगाई जैसी गंभीर समस्याएं आम लोगों को परेशान कर रही हैं, और सरकार नीट (NEET) की परीक्षा तक ठीक से आयोजित नहीं करवा पा रही है, ऐसे समय में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी की जा रही है।
रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था आदिवासी वर्ग और अन्य वर्गों को परेशान करने वाली है, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
भाजपा ने समिति को सौंपे ये बड़े लिखित प्रस्ताव
समान नागरिक संहिता (UCC) के मुख्य उद्देश्य यानी सभी नागरिकों के व्यक्तिगत कानूनों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेना आदि) में एकरूपता लाने के लिए मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और प्रदेश संयोजक (निर्वाचन आयोग समन्वय विभाग) एस.एस. उप्पल द्वारा लिखित में समिति को कई अहम सुझाव सौंपे गए हैं।