नीमच। जिले की स्थापना के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगातार उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। जहां जिला गठन के समय नीमच में केवल सिविल अस्पताल संचालित था, वहीं आज यहां जिला चिकित्सालय के साथ मेडिकल कॉलेज भी संचालित हो रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों, उन्नत चिकित्सा उपकरणों और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था नई ऊंचाइयों पर पहुंची है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश प्रसाद ने बताया कि जिले के गठन के समय सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध थीं, जबकि वर्तमान में लगभग सभी प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञताओं की सेवाएं जिला चिकित्सालय में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही जिले में एक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा छह मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य संस्थानों का हुआ विस्तार-
जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनासा को सिविल अस्पताल में उन्नत किया गया है। वहीं सिंगोली एवं जीरन को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला है। सावन, भादवामाता, भदाना और आंत्री में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं।
जिले में पहले 104 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित थे, जबकि वर्तमान में 108 आयुष्मान आरोग्य मंदिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। अधिकांश केंद्रों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति कर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हुआ जिला चिकित्सालय-
जिला चिकित्सालय नीमच में वर्ष 2020 में लगभग 70 लाख रुपये की लागत से आईसीयू वार्ड का निर्माण किया गया, जो गंभीर मरीजों को उपचार प्रदान कर रहा है। वर्ष 2021 में 66 लाख रुपये की लागत से सेंट्रल पैथोलॉजी लैब स्थापित की गई, जहां विभिन्न जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अस्पताल में निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए 1.14 करोड़ रुपये की लागत से 33 केवी विद्युत ग्रिड का निर्माण कराया गया। नवजात शिशुओं के उपचार के लिए अत्याधुनिक एनआईसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई) भी स्थापित की गई है, जिससे हजारों नवजातों को जीवनदान मिला है।
वर्ष 2018 में निर्मित ट्रॉमा सेंटर वर्तमान में मुख्य ओपीडी भवन के रूप में संचालित है। जिला चिकित्सालय को 100 से बढ़ाकर 200 बिस्तरों का किया गया है।
कोविड काल में बढ़ी स्वास्थ्य क्षमता-
कोविड महामारी के दौरान 10 बिस्तरों वाले आईसीयू का निर्माण किया गया तथा 186 बेड को ऑक्सीजन सुविधा से जोड़ा गया। अस्पताल परिसर में 550 एलपीएम और 330 एलपीएम क्षमता के दो ऑक्सीजन प्लांट तथा 600 किलोलीटर क्षमता का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त मनासा में भी 300 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया है। जिले के मनासा, जावद, रामपुरा, सिंगोली, रतनगढ़ और सरवानिया महाराज में 50-50 बिस्तरों के डोम तैयार किए गए हैं।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में आया सुधार-
जिले के गठन के समय संस्थागत प्रसव की दर 50 प्रतिशत से भी कम थी, जो अब बढ़कर 99 प्रतिशत हो चुकी है। गर्भवती महिलाओं एवं आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिले में 23 एम्बुलेंस संचालित की जा रही हैं, जिनमें एडवांस लाइफ सपोर्ट और बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी शामिल हैं। मृतकों के सम्मानजनक परिवहन हेतु जिला चिकित्सालय में दो निःशुल्क शव वाहन भी संचालित किए जा रहे हैं।
मरीजों को मिल रही निःशुल्क सुविधाएं-
जिला चिकित्सालय में 530 प्रकार की दवाइयां और 110 प्रकार की जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। मरीजों की सुविधा के लिए 24 घंटे सुमन हेल्प डेस्क संचालित है। साथ ही 16 डायलिसिस मशीनों के माध्यम से किडनी मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए पृथक वार्ड संचालित है तथा ब्लड सेंटर में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट स्थापित की गई है, जिससे एक यूनिट रक्त से तीन मरीजों को लाभ मिल रहा है।
आयुष्मान योजना से लाखों लोगों को लाभ-
जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख 53 हजार से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा 18 हजार वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय वंदना कार्ड भी बनाए गए हैं। आयुष्मान कार्डधारकों को चिन्हित अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक तथा वय वंदना कार्डधारकों को 10 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
बाल स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान-
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के तहत अब तक 10 लाख से अधिक बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। इनमें से 3,850 बच्चों की विभिन्न प्रकार की सर्जरी कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया गया। रामपुरा, मनासा, नीमच एवं रतनगढ़ में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों का उपचार किया जा रहा है। वहीं एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत 7 हजार से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण किया गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान-
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम और निक्षय अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए नीमच जिले को कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। वर्ष 2024-25 में 100 दिवसीय निक्षय अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर जिले को सम्मानित किया गया। वहीं वर्ष 2021 में राज्यपाल द्वारा सब-नेशनल सर्टिफिकेट के तहत गोल्ड मेडल भी प्रदान किया गया। जिला चिकित्सालय नीमच ने लक्ष्य, मुस्कान और एनक्वास मूल्यांकन में सफलता प्राप्त की है। इसके अलावा जिले के अनेक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने भी राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर हो रहा विस्तार-
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ सेवाओं, स्वास्थ्य योजनाओं और गुणवत्तापूर्ण उपचार व्यवस्थाओं के कारण आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था निरंतर सुदृढ़ हो रही है और भविष्य में भी स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के लिए कार्य जारी रहेंगे।